वैभव श्रीधर, भोपाल। मध्य प्रदेश में सहकारी समितियों के माध्यम से कर्ज लेने वाले किसानों के साथ अब फर्जीवाड़ा नहीं होगा। इसे रोकने के लिए राज्य सरकार ने नई व्यवस्था बनाई है। इसके तहत किसान की साख (कर्ज) सीमा (क्रेडिट लिमिट) तय होते ही उसे एसएमएस के माध्यम से इसकी सूचना दी जाएगी। साथ ही जैसे ही यह राशि किसान के बचत खाते में जमा होगी तब भी उसे एसएमएस मिलेगा। यह इस बात को प्रमाणित करेगा कि कर्ज की राशि सही खाते में पहुंच गई है। इससे किसान को जानकारी होने के साथ इस व्यवस्था में शामिल एजेंसियों को भी जानकारी मिलती रहेगी।

मालूम हो, कुछ माह पहले ऋण माफी योजना के नाम पर झाबुआ जिले की थांदला आदिम जाति सोसाइटी में डेढ़ करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हुआ था। घोटाला किसानों के नाम पर फर्जी ऋण दर्शाते हुए किया जा रहा था। इस प्रकार की शिकायतें अन्य जिलों से भी सामने आती रही हैं। इसी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए एसएमएस की व्यवस्था लागू की जा रही है।

किसानों को ऋण देने के लिए बैंक जमीन के हिसाब से उनकी साख सीमा तय करते हैं। इसके बाद बैंक संबंधित सहकारी समिति को किसान की साख सीमा की जानकारी देंगे। यह जानकारी समिति के पास पहुंचते ही किसान के पंजीकृत फोन नंबर पर एसएमएस पहुंचेगा कि आपका प्रकरण समिति के पास पहुंच गया है। इससे किसान को अपने प्रकरण की जानकारी मिल जाएगी। गलत होने पर वह आपत्ति दर्ज करा सकेगा। इसी तरह ऋण राशि बचत खाते में पहुंचने पर भी एसएमएस मिलेगा। इसके साथ ही यही एसएमएस मेंबर रजिस्टर में भी दर्ज होगा।

दो बार ले सकते हैं ऋण

प्रदेश में हर साल लगभग 28 लाख किसान सहकारी समितियों के माध्यम से दस हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज खरीफ और रबी फसल के लिए लेते हैं। किसान दो बार ऋण ले सकते हैं। इसमें 75 फीसद राशि नकद और 25 फीसद राशि खाद और बीज के रूप में दी जाती है।

इतना ऋण बांटा गया

वित्त वर्ष -- राशि (लगभग)

2017- 18 --- 13 हजार करोड़ रुपये

2018-19 -- 11 हजार करोड़ रुपये

2019- 20 -- 10 हजार करोड़ रुपये

2020- 21 -- 12 हजार करोड़ रुपये

(नोट- चालू वित्त वर्ष (2021-22) में अभी तक पिछले वर्ष की तुलना में 1700 करोड़ रुपये अधिक ऋण किसानों को दिया जा चुका है।

इनका कहना है

किसानों के साथ गड़बड़ी न हो, इसलिए नई व्यवस्था बनाई गई है। डिजिटल माध्यम से सूचना किसान और सरकार के स्तर पर पहुंच जाएगी। इससे फर्जीवाड़ा करने वालों पर अंकुश रहेगा।

- अरविंद सिंह सेंगर, संयुक्त पंजीयक, सहकारिता विभाग, मध्य प्रदेश

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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