दरोगाजी : एसआइ सेे कार्यवाहक निरीक्षक बनने वालों के गजब किस्से सामने आ रहे हैं। यह कार्यवाहक निरीक्षक थानाप्रभारी के नेतृत्व में ही काम कर रहे हैं। उनका काम उपनिरीक्षक के स्तर का ही है। पिछले दिनों शहर के थाने से पुराने मामले में एक रसखूदार को दिल्ली फोन किया गया, उसे टीआइ बनकर धमकाया गया और कहा कि आप कहीं भी हो, एक घंटे में सीधे थाने पहुंच जाएं। उसे समय और स्थान बता दिया गया, इतना सुनते ही रसूखदार ने पीएचक्यू में एक आइपीएस अफसर मित्र को फोन खटखटाया और पूरा घटनाक्रम बताया। मित्र ने संबंधित टीआइ से मामले में बात की तो पता चला कि उन्होंने तो फोन किया ही नहीं था, उनके स्थान पर थाने के एक कार्यवाहक इंस्पेक्टर ने मामला रचा था और नाराजगी उनको उठानी पड़ी। अंदर की खबर यह है कि अधिकतर थानों में ऐसी स्थिति बन रही है। टीआइ परेशान हो रहे हैं।

डीएसपी की ठसक हुई खत्म

शहर के डीएसपी आजकल ज्यादा ही गरमी दिखा रहे हैं। बात बात में अपना कर्मचारियों से लेकर शिकायतकर्ता से ठसक में बात करना उनकी आदत बन गई है। हर तरफ उनकी इस अकड़ की चर्चा हो रही है। हालांकि गर्मी वाले यह साहब बेहद ही सुस्त हैं। पिछले दिनों उनके इलाके में एक युवक की हत्या कर दी गई। हत्या की खबर लगते ही साहब इतने दहशत में आ गए, जैसे उन्होंने कोई भूत देख लिया हो, सबसे पहले उन्होंने अपने फोन को अपने दूर किया और सिपाहियों से कहा कि किसी का फोन आए तो कह देना कि वह मीटिंग में हैं। वैसे साहब को गरमी अपने एक राजनीतिक रिश्तेदार की है, जिसके कारण वह अपनी मनमर्जी चलाया करते हैं। उनके रवैए पर गुलजार की चंद लाइनें सटीक बैठती हैं। जैसे बरसात गिरी और कानों में इतना कह गई कि गरमी किसी की भी हमेशा नहीं रहती।

पुलिस को पिछली बार से ज्यादा अब के कोरोना से नुकसान हो रहा है। हालत यह है कि आला अधिकारी लगातार पुलिस कर्मिर्यों को कोरोना से बचने के लिए लोगों से दूरी बनाने के लिए कह रहे हैं। इसके बाद भी साढे तीन सौ करीब पुलिसकर्मी संक्रमित हो चुके हैं। हालांकि यह संख्या पीएचक्यू, एसएएफ और एसटीएफ को मिलाकर है। संक्रमण से पांच के करीब पुलिस कर्मी भी जान गवां चुके हैं। कोरोना का यह डंक क्राइम ब्रांच तक पहुंच गया।शहर के बदमाश क्राइम ब्रांच के नाम से डरते हैं, लेकिन कोरोना से क्राइम ब्रांच दहशत मे है। क्राइम ब्रांच के दर्जनभर के करीब पुलिसकर्मी संक्रमित हो गए और अपने घर में इलाज ले रहे हैं। दहशत ऐसी है कि क्राइम ब्रांच के मुखिया ने भी घर से ही काम करना शुरू कर दिया है। नतीजतन आपराधिक मामलों की जांच की रफ्तार थम गई है।

रेमडेसिविर आपदा में भी दे रहा अवसर

रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी जोरों पर चल रही है। इंजेक्शन के कारण पुलिस को भी आपदा में अवसर मिल गया है। ऐसा ही अवसर पुराने शहर के एक थाने को मिला है। सुना है इस थाने ने पिछले चार दिनों में रेमडेसिविर के इंजेक्शन को लेकर लगातार कार्रवाई की है, तुक्के में उनके हाथ एक गिरोह लग गया है, जो उनके थाने के बगल में बने बड़े अस्पताल में इन रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की कर रहा था, उस थाने के कुछ पुलिसकर्मियों ने तीन बदमाशों को धरदबोचा और उनको थाने में बैठाकर अपने साहब को सूचना दे दी। साहब ने आने के बाद इंजेक्शन को अपने कब्जे में लिया और आरोपितों को सेवा होने के बाद छोड़ दिया गया। इसका पता आरोपितों को हिरासत में लेने वाले पुलिसकर्मियों लगा तो उन्होंने आला अधिकारियों को पूरा घटनाक्रम बता दिया। सुना है कि टीआइ साहब की रोजाना क्लास ली जा रही है।

Posted By: Ravindra Soni

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