भोपाल (नवदुनिया स्टेट ब्यूरो)। शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। प्रदेश के चार शहरों (भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर) में ही 155 स्कूलों के पास तंबाकू उत्पाद बेचे जा रहे हैं। देश के 25 शहरों में ऐसे स्कूलों की संख्या 885 है। ऐसे स्थानों पर तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन ऐसे प्रदर्शित किए गए कि खतरों की चेतावनी दिखाई न दे। यह जानकारी संस्था कंज्यूमर वॉइस, नई दिल्ली और नेशनल सेंटर फॉर ह्यूमन सेटलमेंट्स एंड एनवायरनमेंट, भोपाल की सर्वे रिपोर्ट में सामने आई है। यह सर्वे अक्टूबर से दिसंबर 2019 में किया गया था।

इससे संबंधित जानकारी के लिए मंगलवार को राज्य स्तरीय कार्यशाला हुई। इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी की सुरक्षा के लिए तंबाकू विक्रेता लाइसेंस, प्रभावी तंबाकू नियंत्रण उपायों का समर्थन और हितधारकों को संवेदनशील बनाना था। कंज्यूमर वॉइस के वरिष्ठ सलाहकार हेमंत उपाध्याय ने बताया कि मध्य प्रदेश में 76.13 प्रतिशत बिक्री केंद्रों ने बच्चों की निगाह में आने लायक स्तर (लगभग एक मीटर) पर तंबाकू उत्पादों को प्रदर्शित किया। 71.61 प्रतिशत बिक्री केंद्रों ने सिगरेट को इस तरह से प्रदर्शित किया कि अनिवार्य स्वास्थ्य चेतावनी छिप जाए। 68.39 प्रतिशत बिक्री केंद्रों ने बच्चों को आकर्षित करने के लिए केंडी और मिठाइयों के विज्ञापन के पास सिगरेट के विज्ञापन का प्रदर्शन किया।

औषधीय पौधों की खेती करें

पूर्व सिविल सर्जन डॉ. एसके सक्सेना ने कहा कि तंबाकू से होने वाले कैंसर के मरीजों की संख्या देश में बढ़ती जा रही है। उचित यह होगा कि तंबाकू के उत्पादन पर ही रोक लगा दी जाए। तंबाकू उत्पादक किसान वैकल्पिक रूप से औषधीय पौधों की खेती कर सकते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी-खासी मांग है। वहीं संगठन ने अनुशंसा की है कि तंबाकू नियंत्रण कानून में संशोधन किया जाए। तंबाकू उत्पादों को प्रदर्शित करने वाले सभी बिक्री केंद्रों पर प्रतिबंध लगाया जाए।

Posted By: Prashant Pandey

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