Tokyo Olympics: भोपाल (नवदुनिया प्रतिनधि)। टोक्यो ओलिंपिक में भारतीय पुरुष टीम ने कांस्य पदक जीतकर देश 41 साल के पदक के सूखे को समाप्त किया है। मध्य प्रदेश हाकी अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विवेक सागर प्रसाद और नीलाकांता शर्मा का इस जीत में विशेष योगदान है। अब इन दोनों खिलाडि़यों के भोपाल आगमन पर जोरदार स्‍वागत की तैयारी की जा रही है। हॉकी भोपाल के सचिव जलालउददीन रिजवी ने कहा कि दोनों ने देश का नाम रोशन किया है।

मप्र हाकी अकादमी की स्थापना भोपाल में 2007-08 में हुई थी। यानी 14 साल के कड़े परिश्रम के बाद अकादमी को दो अनमोल सितारे विवेक और नीलाकांता ने पदक दिलाया है। इससे पहले 49 साल पहले असलम शेर खान ने 1972 म्यूनिख ओलिंपिक में कांस्य पदक दिलाया था। इस टीम में मेजर ध्यानचंद के पुत्र अशोक ध्यानचंद भी थे। मप्र अकादमी बनने के बाद अशोक ध्यानचंद ही अकादमी के पहले मुख्य कोच बने थे और उन्होंने ही इन दो सितारों को परखा और अकादमी में प्रवेश दिलाया था। इसमें विवेक तो अकादमी में प्रवेश से पहले कई माह तक अशोक ध्यानचंद के घर पर ही रहे थे।

इन्होंने बढ़ाया प्रदेश का मान

53 साल पहले 1968 मैक्सिको ओलिंपिक में इनाम उर रहमान ने कांस्य पदक जीता था। भारत ने तब यह पदक जर्मनी को ही हराकर हासिल किया था। असलम शेर खान के पिता अहमद शेर खान 1936 की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम के सदस्य थे। इस टीम में भोपाल के एहसान मोहम्मद भी शामिल थे। 1948 में अख्तर हुसैन और लतीफ उर रहमान स्वर्ण पदक विजेता टीम में थे। महू के शंकर लक्ष्मण 1956 और 64 की स्वर्ण व 60 की रजत विजेता टीम के सदस्य थे।

शिवेंद्र ने विवेक और नीलाकांता को गले लगाया

2012 लंदन ओलिंपिक में देश के लिए गोल करने वाले प्रदेश के शिवेंद्र सिंह भी टोक्‍यो में भारतीय कोचिंग टीम के सहयोगी स्‍टाफ के साथ गए थे। जब भारतीय टीम ने कांस्‍य पदक जीता तो शिवेंद्र ने विवेक सागर और नीलांकाता को गले लगा लिया।

Posted By: Lalit Katariya

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close