Tokyo Olympics: भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। टोक्‍यो में अपने नाम का डंका बजाने वाले विवेक सागर ने पदक जीतने से पहले ही अपने सीनियर और साथी खिलाडि़यों को जीत लिया था। उनके साथ खेलने वाले खिलाडि़यों ने कहा कि अनुशासन और कड़ी मेहनत विवेक और नीलाकांत की सफलता का राज राज है। इसी कारण वह आज यह सफलता प्राप्‍त कर रहा है।

आयकर विभाग में कार्यरत मोहित पाठक ने मध्‍य प्रदेश हॉकी अकादमी में विवेक के साथ रहे है। उन्‍होंने कहा कि विवेक को अनुशासन पसंद है, हर दिन समय पर मैदान पर अभ्‍यास करने पहुंच जाता था। हमेशा अपने खेल को सुधारने के लिए साथी खिलाड़ी और सीनियर से चर्चा करना उसे पंसद है। वह बहुत ही प्रतिभाशाली खिलाड़ी है। दिल्‍ली में हम साथ नेहरु कप में साथ खेले थे, उसके प्रदर्शन से ही हमने खिताब जीता था। तभी मुझे विश्‍वास हो गय था कि यह बहुत आगे जाएगा।

रेलवे में कार्यरत मोहम्‍मद निजाम ने कहा कि नीलाकांता और विवेक दोनों ही बहुत मेहनती है, हास्‍टल में हमने लम्‍बा समय बिताया है। नीलाकांता मेरे साथ ही मुंबई में नौकरी करता है। हमे पता था कि वह भारत के लिए खेलेगा। मैने भी उसके साथ राष्‍ट्रीय कैंप में रहा हूं। हम तीनों की कोच लोकेन्‍द्र शर्मा और हबीब हसन ने बहुत मदद की है।

रेलवे में कार्यरत अर्जुन शर्मा ने कहा कि मुझे दोनों के साथ खेलने और साथ रहने का मौका मिला है। विवेक हमेशा ही अनुशासन में रहने वाला खिलाड़ी रहा है। उसे हर समय हाकी के बारे में बात करना ही पंसद था। कई बार बिना परमिशन हम परिसर के बाहर चले जाते थे। लेकिन यह दोनों कभी भी हमारे साथ नहीं गए। दोनों भाइयों ने पदक जीतकर हम सब का मान बढ़ा दिया है।

Posted By: Lalit Katariya

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