- घटना के वक्त एसडीईआरएफ के एक भी जवान व बोट नहीं थे

- तैरना नहीं जानने वाले कर्मचारियों की लगाई थी ड्यूटी

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

बारिश के समय प्रदेश की जिस एसडीईआरएफ से लोगों के जानमाल की सुरक्षा की उम्मीद रहती है, उसी की लापरवाही से खटलापुरा घाट में नाव पलटने के बाद 11 जानें नहीं बचाई जा सकी। एसडीईआरएफ ने 19 दिन पहले 25 अगस्त को खटलापुरा घाट पर बड़ी मॉकड्रिल की थी। तब आठ बोटें उतारीं थीं। शुक्रवार तड़के जब उसी घाट पर नाव पलटी और 11 युवक डूब रहे थे, तब एसडीईआरएफ की वहां सिर्फ एक बोट थी, वह भी काम नहीं आई। यदि बोट व जवान होते तो 11 जान बचाई जा सकती थीं।

5 लीटर डीजल दिया था, इसलिए गश्ती की बजाए एक तरफ खड़ी थी बोट

संभावित हादसों से निपटने के लिए खटलापुरा घाट पर एसडीईआरएफ के अफसरों ने सिर्फ एक बोट उतारी थी जो गश्ती करने की बजाए एक तरफ खड़ी कर दी गई थी। एसडीईआरएफ के एक जवान ने बताया कि बोट के लिए अधिकारियों ने सिर्फ 5 लीटर डीजल दिया था। यदि गश्ती करते तो डीजल जल्दी खत्म हो जाता। इस कारण बोट मंदिर तरफ खड़ी कर दी थी। सूत्रों ने बताया कि एसडीईआरएफ का एक भी जवान घटना के समय मौजूद नहीं था।