भोपाल। आखिरकार राज्य शासन ने करीब डेढ़ साल से अटकी कैब पॉलिसी को लागू कर दिया। नई कैब पॉलिसी के तहत राजधानी सहित प्रदेश में कंपनी बनाकर चलाए जाने वाले सभी कैब और ऑटो में ड्राइवर का फोटो, नाम, टेलीफोन, लाइसेंस नंबर और वाहन की श्रेणी, बीमा की समावधि प्रमाण पत्र सहित अन्य जानकारियों को वाहनों में डिस्प्ले करना होगा। इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा के लिए कैब में पैनिक बटन लगाना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं नए नियमों के अनुसार भोपाल सहित प्रदेश के किसी भी शहर में कंपनी बनाकर कैब का संचालन करने पर लाख रुपए की बैंक गारंटी भी देनी होगी।

कंपनी में लगाए जाने वाले ऑटो रिक्शा को चलाने के लिए दो लाख व किराए पर मोटर साइकिल संचालन के लिए एक लाख रुपए की बैंक गारंटी ली जाएगी। वहीं कैब संचालन की लाइसेंस फीस 50 हजार रुपए होगी। ऑटो रिक्शा के लिए फीस 25 हजार और बाइक टैक्सी लिए 15 हजार होगी। नए नियम एक से दो टैक्सी, ऑटो व मोटर साइकिल का संचालन किराए पर कर रहे हैं, वे इनके दायरे में नहीं आएंगे। भोपाल में करीब साढ़े 12 हजार ऐसे ऑटो रिक्शा व 3 हजार टैक्सी का संचालन किया जा रहा है। ऐसे वाहन नए नियमों में नहीं आएंगे।

परिवहन आयुक्त डॉ शैलेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि मप्र मोटरयान अधिनियम, 1988 के तहत मप्र कैब, मोटर कैब, ऑटो रिक्शा तथा मोटर साइकिल भाड़े पर देने के लिए एग्रीगेटर नियम, 2018 लागू करने संबंधी राजपत्र जारी किया है। इसके अनुसार किसी भी कैब या अन्य कंपनी को कम से कम 25 गाड़ियां जरूरी होंगी। इसके बाद ही यात्रियों को बैठाने का लाइसेंस जारी किया जाएगा।

इन नियमों का किया गया प्रावधान

-वाहनों में यात्रा करने वाले यात्री को, संबंधित कंपनी प्रिंटेट रसीद उपलब्ध कराएगी। रसीद ई-मेल या मोबाइल पर या फॉर्म में देना होगी।

-कैब या ऑटो चलाने वाली कंपनी के मालिकों को पहली बार में दो साल के लिए लाइसेंस दिया जाएगा। समयावधि समाप्त होने पर नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा।

- कंपनी संचालित कैब, ऑटो व मोटर साइकिल का किराया निर्धारित करने का अधिकार रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (आरटीए) को होगा।

- कंपनियों से अनुबंध करने वाले तभी लाइसेंस दिया जाएगा। जब उसके पेट्रोल या सीएनजी अथवा एलपीजी या बैटरी से चलित गाड़ियां हों। डीजल से चलने वाली किट होना जरूरी होगा।