भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। हमीदिया अस्पताल में मरीजों के इलाज में लापरवाही की बात तो आम है। अब मुर्दों के साथ भी लापरवाही शुरू हो गई है। गुरुवार को यहां की मर्च्‍युरी में दो महिलाओं के शवों को आपस में बदल दिया गया। इसमें एक शव मुस्लिम महिला का था और दूसरा शव हिंदू महिला का। मुस्लिम महिला के शव का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से हो चुका है। इस बात का खुलासा होने पर अस्पताल में हंगामा मच गया। इस मामले में हमीदिया अस्पताल अधीक्षक डॉ. आईडी चौरसिया का कहना है कि दोनों शवों पर सही टैग लगाए गए थे। गलती बस इतनी है कि हिंदू महिला का स्‍वजन नारायण, जो मृतका देवर है, वह अनपढ़ हैं और मर्च्‍युरी में जिन दो कर्मचारियों ने शव निकालकर नारायण को दिया, वे दोनों भी अनपढ़ हैं। इसलिए कोई भी शव पर लगे टैग को नहीं पढ़ सका और श्मशान पहुंचकर सीधे शव का अंतिम संस्कार कर दिया। हम इस गलती के लिए बहुत शर्मिंदा हैं।

क्या है मामला

हमीदिया अस्पताल के कोविड वार्ड में गुरुवार तड़के साढ़े चार बजे दो कोरोना मरीजों की मौत हुई। इसमें एक थी 70 वर्षीय नफीसा, जो कि लालघाटी क्षेत्र की रहने वाली थी। दूसरी मौत नजीराबाद के एक गांव की रहने वाली शीला बाई की हुई। अस्पताल प्रबंधन ने दोनों मृतकों के परिजन को सूचना दी और दोनों के शव मर्च्‍युरी में रखवा दिए। इसके बाद सुबह 11 बजे नारायण को नफीसा का शव सौंप दिया। नारायण ने चेहरा देखे बगैर नफीसा बी का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज और कोरोना प्रोटोकॉल के तहत कर दिया। जब नफीसा के बेटे जब्बार खां मर्चुरी पहुंचे अपनी मां के नाम से शव मांगा तो उन्हें जो शव दिया गया, वो किसी और का था। इस मामले में जांच के बाद दो स्वास्थ्यकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।

Posted By: Ravindra Soni

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