धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। उत्तर प्रदेश में संभावित विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती होगा। पिछले तीन दशक से पार्टी सत्ता से बाहर है और सीटों के लिहाज से सदन में भी प्रभावहीन हो चुकी है। इस बार तो समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी सहित अन्य दलों के साथ गठबंधन की गुंजाइश भी लगभग खत्म है। इधर, प्रियंका गांधी वाड्रा राज्य में पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयासरत हैं। ऐसे में पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से भी दिग्गज नेताओं को सियासी जंग में उतारने की तैयारी है। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव और पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल मध्य प्रदेश से पांच ऐसे प्रमुख चेहरे हैं, जो उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए सहायक साबित हो सकते हैं।

1. पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ

कांग्रेस में कभी गांधी परिवार के सबसे प्रभावशाली सदस्य संजय गांधी के करीबी रहे कमल नाथ का उत्तर प्रदेश से पुराना रिश्ता है। कमल नाथ का जन्म कानपुर में हुआ है तो उनके दादा बरेली की तहसील आंवला के निवासी बताए जाते हैं। उन्होंने कोलकाता जाने के पहले अपना मकान गांव को दान कर दिया था। चुनाव प्रचार के मैदान में इनके उतारे जाने की पूरी तैयारी है।

2. राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह

मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह लंबे समय तक उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश के कई सामाजिक, शैक्षणिक संस्थाओं से भी जुड़े हुए हैं। अपने विवादित बयानों के चलते वह उत्तर प्रदेश में भी खासे चर्चा में रहते हैं। धार्मिक आधार पर मतों का ध्रुवीकरण होता है तो कांग्रेस को दिग्विजय सिंह की छवि का लाभ भी मिल सकता है।

3. राज्य सभा सदस्य विवेक तन्खा

पेशे से सुप्रीम कोर्ट में वकील और राज्य सभा सदस्य विवेक तन्खा अपनी स्पष्टवादिता की छवि के लिए दलीय सीमा से परे भी पसंद किए जाते हैं। तन्खा पार्टी के विधिक मामलों को देखने के अलावा अब चुनावों में भी रुचि लेते दिखाई पड़ रहे हैं। उन्हें कांग्रेस उत्तर प्रदेश अधिवक्ताओं और बुद्धिजीवियों के बीच पैठ बनाने के लिए भेज सकती है।

4. पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव

कांग्रेस में फिलहाल केंध से प्रदेश स्तर तक ओबीसी चेहरों की कमी है। ऐसे में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव उत्तर प्रदेश में जातिगत समीकरणों को साधने में कांग्रेस के पास ओबीसी नेताओं की कमी को दूर कर सकते हैं। वे सोनिया और राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं।

5. पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल

इंदौर की पांच नंबर सीट तथा देपालपुर से विधायक रहे सत्यनारायण पटेल कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश का सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। वर्तमान में पटेल प्रियंका गांधी के साथ लगातार उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक उनकी यह सक्रियता चुनाव प्रचार के दौरान भी बनी रहेगी।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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