भेल दशहरा मैदान में आठवें भोपाल विज्ञान मेले का शुभारंभ

भोपाल। नवदुनिया रिपोर्टर

सेटेलाइट को मिसाइल से भेदने का काम हमारे लिए किसी बड़े चैलेंज से कम नहीं था। यदि गलती से भी हम किसी अन्य देश की सेटेलाइट को हिट कर देते तो दो देशों में यद्घ शुरू हो सकता था। केवल बाहर की बात नहीं चैलेंज घर के अंदर भी कम नहीं थे। हम मिसाइल बनवा रहे थे, लेकिन कानों-कान किसी को खबर नहीं होनी थी इसके बारे में। हर चीज सीक्रेटली करनी थी। हम जिस टीम से काम करा रहे थे, उन्हें तक मिशन की कोई जानकारी नहीं थी।

अपने इसी तरह के अनुभव ख्यात वैज्ञानिक डॉ. यू राजाबाबू ने शेयर किए। वे भेल दशहरा मैदान में शुरू हुए भोपाल विज्ञान मेले के शुभारंभ कार्यक्रम में बोल रहे थे। लोगों को साइंस और टेक्नोलॉजी में लोकल, रीजनल, नेशनल और ग्लोबली होने वाले डेवलपमेंट से रूबरू कराने के उद्देश्य से आयोजित विज्ञान मेले का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। इस चार दिवसीय मेले का शुभारंभ प्रदेश के साइंस और टेक्नोलॉजी मंत्री पीसी शर्मा के विशिष्ट आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर सीएसआईआर, दिल्ली के महानिदेशक डॉ. शेखर सी मांडे विशेष रूप से उपस्थित थे। इस मौके पर डॉ. यू राजाबाबू का सम्मान भी किया गया।

-साइंस मॉडल से सजे स्टॉल और थीम पवेलियन

प्रदेशभर के विभिन्ना शासकीय और अशासकीय विभागों के स्टॉल से सजे मेले के शुभारंभ अवसर पर मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि इस बार इस मेले में अलग-अलग थीम पवेलियन न केवल इसे रुचिकर और आकर्षक बना रहे हैं, बल्कि इससे आम जनता को चीजों को समझने में भी आसानी होगी।

सीएसआईआर नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. शेखर सी मांडे ने मेले का महत्व और उपयोगिता बताते हुए कहा कि भारत लगातार दुनिया के सामने विज्ञान के क्षेत्र में खुद को साबित कर रहा है। भारतीय वैज्ञानिक व अनुसंधान लगातार कम संसाधनों का उपयोग कर कम खर्च में विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं, जो अपने आप में उत्कृष्ट उदाहरण है। उल्लेखनीय है कि मेले का आयोजन भोपाल सीएसआईआर-एम्प्री, विज्ञान प्रसार, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, नई दिल्ली और विज्ञान भारती, भोपाल की ओर से संयुक्त रूप से किया जा रहा है। हालांकि, पहला दिन और तेज बारिश की वजह से देर शाम तक कम स्टॉल ही लग पाए थे।