भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। प्रदेश में पहली बार वर्चुअल कैबिनेट बैठक होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित सभी मंत्री और अधिकारी मंगलवार को सुबह 11 बजे जुड़ेंगे। इस दौरान चंबल प्रोग्रेस वे को लेकर प्रस्तुतिकरण होगा। मंत्रिपरिषद का जो सदस्य जहां है, वहीं से बैठक में शामिल होगा। इसके लिए सभी को वेब लिंक मुहैया करा दी गई हैं। बैठक से पहले सुबह साढ़े नौ बजे ट्रायल रन भी होगा ताकि बैठक के समय कोई समस्या न आए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भोपाल के चिरायु अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।

सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया भी वहीं भर्ती हैं। ओमप्रकाश सकलेचा, कमल पटेल सहित कुछ अन्य मंत्री होम क्वारंटाइन हैं। वहीं, कुछ क्षेत्र के दौरे पर हैं। मुख्यमंत्री के संपर्क में आए अधिकारी भी होम क्वारंटाइन हैं। वहीं, भोपाल में कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए चार अगस्त तक पूरी तरह लॉकडाउन किया गया है। मंत्रालय सहित राज्य स्तरीय कार्यालयों में तीस फीसद स्टाफ के साथ कार्य संचालित किए जा रहे हैं। हालांकि, लॉकडाउन और अनलॉक अवधि में मुख्यमंत्री लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोरोना के अलावा विभागीय समीक्षाएं करते रहे हैं।

इसी पद्घति पर अब कैबिनेट बैठक करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों ने बताया कि सभी मंत्रियों को वेबलिंक भेज दी गई है। बैठक से पहले ट्रायल रन करके देखा जाएगा। मंत्री और अधिकारी लैपटॉप, डेस्कटॉप और मोबाइल के माध्यम से बैठक में हिस्सा ले सकेंगे। राष्ट्रीय सूचना केंद्र की टीम ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल की वर्चुअल बैठक का देश में यह पहला मौका है।

एक दर्जन मुद्दों पर होगा विचार

सूत्रों का कहना है कि मेधावी विद्यार्थी योजना में लैपटॉप देना, अधिकारियों-कर्मचारियों को वार्षिक वेतनवृद्घि देने के अलावा एक दर्जन से ज्यादा मुद्दों पर बैठक में विचार किया जा सकता है। चंबल प्रोग्रेस वे को लेकर प्रस्तुतिकरण भी बैठक में होगा। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के विकास के मद्देनजर इस परियोजना को काफी अहम माना जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि विधानसभा उपचुनाव की घोषणा पूरी होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों परियोजना का शिलान्यास कराया जाए। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा प्रारंभिक तैयारियां कर ली गई हैं।

मुख्यमंत्री ने पिछले कार्यकाल में की थी तैयारी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले कार्यकाल में मंत्रालय और विभागाध्यक्ष का पूरा काम ऑनलाइन करने के लिए ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की थी। मंत्रियों से लेकर कर्मचारियों को ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर में काम करने का प्रशिक्षण दिलाया गया था। कुछ दिन तो विभागों में ई-ऑफिस पर काम हुआ लेकिन इसमें आ रहे व्यवधान का असर कामकाज पर जब पड़ने लगा तो तत्कालीन मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने इसे ऐच्छिक कर दिया था।

इसका असर यह हुआ कि विभागों ने ई-ऑफिस पर काम करना पूरी तरह बंद कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने भी इस व्यवस्था को लागू करने के लिए तीन चरण तय किए पर क्रियान्वयन नहीं हो सका। सत्ता परिवर्तन के बाद कोरोना संकट की वजह से पूरा कामकाज वीडियो कॉन्फेंसिंग के माध्यम से होना लगा।

मुख्यमंत्री ने कोरोना पॉजिटिव होने के पहले तक इसी माध्यम से लगातार समीक्षाएं की। इतना ही नहीं जब केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर भोपाल आए थे, तब वह भी मंत्रालय में जाकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक में शरीक हुए थे।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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