भोपाल। मौजूदा अनुमान के लिहाज से देश में भले ही मानसून की वर्षा कमजोर हो, लेकिन मध्यप्रदेश में बरसात सामान्य से महज दस फीसदी कम होने के आसार हैं। जो सामान्य मानी जाती है। अभी तक की स्थिति के मुताबिक यदि 5 जून को मानसून केरल पहुंचता है, तो प्रदेश में 15 जून को दस्तक देने और पूरे प्रदेश में 22 जून तक छा जाने की संभावना है। शुरुआत में जून, जुलाई में झमाझम बरसात होगी, लेकिन अलनीनो के असर से अगस्त-सितंबर माह में बरसात कम हो सकती है। लिहाजा किसानों को कम समय में तैयार होने वाली खरीफ फसलों का चयन करना लाभप्रद होगा।

यह जानकारी मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. अनुपम काश्यपि ने पत्रकारों की दी। यह पहला मौका है जब मौसम केंद्र ने मानसून की संभावित तारीख की अधिकृत रूप से घोषणा की है। डॉ. काश्यपि ने बताया कि मप्र. में औसत बर्षा 90 प्रतिशत होगी। दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रदेश के दक्षिण भाग में 15 जून को प्रवेश कर जाएगा। साथ ही 22 जून तक पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा। जून से सितंबर के बीच पश्चिमी मप्र. में 788.4 मिमी. वर्षा होने की संभावना है, जो कि सामान्य से 9 सेमी. कम है। इसी तरह पूर्वी मप्र. में 946.0 मिमी. बरसात के आसार हैं, जो कि सामान्य से 11 सेमी. कम हैं।

संभावित वर्षा

पश्चिमी मध्यप्रदेश

माह-----वर्षा (मिमी)

जून-----94.8

जुलाई---262.6

अगस्त--277.6

सितंबर--153.4

जो कि औसत वर्षा से 9 सेमी. कम है

वर्ष-2014 में औसत से 12 फीदसी कम हुई थी।


पूर्वी मध्यप्रदेश

जून-----120.2

जुलाई---312.9

अगस्त---332.9

सितंबर---180.0

जो कि औसत वर्षा से 11 सेमी.कम है।

वर्ष-2014 में औसत से 29 फीसदी कम हुई थी

अगस्त-सितंबर में दिखेगा अलनीनो का असर

डॉ. काश्यपि ने बताया कि जून-जुलाई में जोरदार बरसात होने की संभावना है। लेकिन इसके बाद अगस्त-सितंबर में अलनीनो के असर से मानसून के प्रभावित होने की आशंका है। इसके लिए किसानों को अभी से खरीफ के लिए इस तरह की फसलों का चयन करना चाहिए, जो कि कम समय में तैयार होती है। साथ ही नुकसान से बचने के लिए फसलों की बीमा जरूर कराएं।

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