भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि, Webinar on Lockdown and Children:! एक बार फिर से कोरोना का संक्रमण बेकाबू होने लगा है, जिसके चलते एक बार फिर से लॉकडाउन की नौबत आ गई है। हालांकि इस बार लॉकडाउन को कोरोना कर्फ्यू नाम दिया गया है, लेकिन बंदिशें तो है हीं। बच्चे इन सबसे बहुत परेशान हैं, लेकिन उन्‍हें यह समझना होगा कि यह समय परेशान होने का नहीं बल्कि सावधान रहने का है। बड़ों के साथ-साथ बच्‍चे भी 'दो गज की दूरी और मास्क है जरूरी' के मूलमंत्र का पालन करें और घर से बाहर न निकलें। खुद भी सुरक्षित रहें और अपने दोस्तों और परिजनों को भी सुरक्षित रखें। यह विचार नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ वुमन, चाइल्ड एंड यूथ डेवलपमेंट- बचपन और बाल पंचायत द्वारा आयोजित ऑनलाइन विमर्श में वक्ताओं ने अभिव्यक्त किए।

इस ऑनलाइन विमर्श यानी वेबिनार में बाल कल्याण समिति के सदस्य डॉ. कृपाशंकर चौबे और यूनिसेफ भोपाल में बाल संरक्षण परामर्शदाता अमरजीत कुमार सिंह उपस्थित थे। वेबिनार का संचालन सत्येंद्र पांडेय ने किया। विमर्श के आरंभ में बाल पंचायत भोपाल की अध्यक्ष पल्लवी मोहबे ने कहा कि संक्रमण की ख़बरों के कारण बच्चे बहुत तनाव में हैं। बच्चों का तनाव इसलिए भी बढ़ रहा है कि परीक्षाओं के बारे में अभी कुछ पता नहीं है कि वे होंगी या नहीं, होंगी तो कब होंगी। ऑनलाइन होंगी या ऑफलाइन और यदि जनरल प्रमोशन होगा तो फिर कॉलेज में एडमिशन आदि का क्या होगा। ईश्वर बाल समूह की विशिष्ट पंच कनक वर्मा ने बताया कि बस्ती में लोग इस बात से बहुत परेशान हैं कि यदि किसी को कोरोना हो गया तो फिर क्या होगा, क्योंकि अस्पतालों में इलाज नहीं मिल पा रहा है और ऑक्सीजन वगैरह की कमी पड़ रही है।

लॉकडाउन में कौशल विकास पर ध्यान दें

बच्चों के सवालों को संबोधित करते हुए बाल कल्याण समिति, भोपाल के सदस्य डॉ. कृपाशंकर चौबे ने कहा कि बच्चों को इस बात का तनाव नहीं लेना चाहिए कि परीक्षा का क्या होगा, बल्कि वे सिर्फ अपनी पढाई पर फोकस करें और जिनकी गर्मियों की छुट्टियां चालू हो गईं हैं, वे इन समय का इस्तेमाल कोई नया कौशल सीखने में करें। यूनिसेफ भोपाल में बाल संरक्षण परामर्शदाता अमरजीत कुमार सिंह ने बच्चों के उन सवालों पर फोकस किया, जो उनके परिवारों की जरूरतों के संबंध में थे। उन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा आपको संकट में दिखता है या बालश्रम कर रहा है तो चाइल्डलाइन को फोन करें। दोनों ही वक्ताओं ने बच्चों को सलाह दी कि अपनी सोच सकारात्‍मक रखें। टीवी पर अच्छे मनोरंजक कार्यक्रम देखें और कहानी आदि की किताबें पढ़ें। इस अवसर पर बच्चों के लिए कार्यरत बहुत से लोगों ने फेसबुक लाइव के माध्यम से सवाल भी पूछे, जिनके उत्तर वक्ताओं ने दिए।

Posted By: Ravindra Soni

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