भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल की व्यवस्थाओं के खिलाफ बुधवार पूर्व सांसद आलोक संजर धरने पर बैठ गए। संजर का आरोप था कि ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित मरीज को दो दिन से भर्ती नहीं किया जा रहा है। मेर द्वारा आग्रह करने के बावजूद मरीज को बाहर कर दिया। अभद्रता भी की है। संबंधित डाक्टर से मैंने बातचीत करनी चाही तो भी उन्होंने मदद नहीं की।

आलोक संजर शाम तक धरने पर बैठे रहे। यह जानकारी उनके समर्थकों व भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को लगी तो वे भी एम्स पहुंचने लगे। भीड़भाड़ होने लगी। माहौल बिगड़ता देख एम्स के डाक्टरों ने भी काम बंद कर दिया और वे भी विरोध में बाहर आ गए। डॉक्टरों की तरफ से एम्स की अधीक्षक डा मनीषा श्रीवासतव का दावा है कि आलोक संजर संबंधित डाक्टर से बाहर आकर माफी मांगने की जिद पर अड़े थे जो कि संभव नहीं था। मरीज की पूरी मदद की गई थी। संजर के धरने पर बैठने के कारण एम्स में व्यवस्था बिगड़ रही थी, जिसके कारण डाक्टर बाहर आ गए थे।

अधीक्षक के दावों पर पलटवार करते हुए पूर्व सांसद आलोक संजर ने कहा कि उन्होंने किसी डाक्टर से माफी मांगने के लिए नहीं कहा। वे व्यवस्थाओं के खिलाफ नाराज हैं। यदि जनप्रतिनिधियों के कहने के बावजूद मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है तो आम मरीजों के साथ किए जाने वाले व्यवहार का अंदाजा लगाया जा सकता है।

रीवा के रहने वाले मरीज बालेंद्र मिश्रा

मरीज बालेंद्र मिश्रा के लिए एम्स में विवाद हुआ है। वह ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हैं। एम्स में अपना इलाज कराने आए थे। शुरू में खुद से प्रयास किया। जब उन्हें भर्ती नहीं किया गया तो उन्होंने पूर्व सांसद आलोक संजर की मदद ली थी। उन्हीं के कहने पर वह एम्स के ट्रामा सेंटर गए थे, जहां एक महिला डाक्टर ने बिस्तर खाली नहीं होने की बात कहते हुए उन्हें बाहर कर दिया। मरीज के स्वजनों ने यह जानकारी फोन पर आलोक संजर को दी तो उन्होंने स्वजनों के जरिए संबंधित डाक्टर से बात करनी चाही। डाक्टर ने कह दिया कि वे किसी पूर्व सांसद आलोक संजर को नहीं जानतीं। साथ में यह भी कह दिया कि ट्रामा से बाहर हो जाएं।

Posted By: Ravindra Soni

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