भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। विवाद बढ़ता देख पश्चिम-मध्य रेलवे प्रबंधन ने रेलवे मजदूर संघ (डब्ल्यूसीआरएमए) की सीएम उपाध्याय व अशोक शर्मा वाली कार्यकारिणी पर रोक लगा दी है। रोक लगाने संबंधी जानकारी भोपाल रेल मंडल के डीआरएम सौरभ बंदोपाध्याय को भी प्रेषित कर दी है। जोन के अधिकारियों ने हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद रोक लगाने संबंधी आदेश मंगलवार को जारी किए। जोन के ही सहायक कार्मिक अधिकारी एवं कल्याण अभय कुमार गुप्ता ने 28 अक्टूबर को उक्त कार्यकारिणी को परिपत्रित किया था। जिसमें अशोक शर्मा और अनुज तिवारी का नाम भी शामिल है। जिस समय उक्त कार्यकारिणी को रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन का हवाला देते हुए परिपत्रित किया था, उसके पूर्व अशोक शर्मा और अनुज तिवारी पर जबलपुर के ओमती थाना में अपराध दर्ज हो चुका था। सूची में आरोपितों का नाम शामिल होने के बावजूद अधिकारियों ने उक्त कार्यकारिणी को सूचीबद्ध किया था और सभी डीआरएम और ब्रांच अधिकारियों को इसकी सूचना भी दे दी थी। इसमें से अशोक शर्मा भोपाल रेल मंडल में वरिष्ठ लोको निरीक्षक के पद पर पदस्थ हैं और पश्‍चिम-मध्‍य रेलवे मजदूर संघ में महामंत्री रह चुके हैं। इन्हें आरपी भटनागर द्वारा हटाने का दावा किया जा रहा है। अशोक शर्मा, अनुज तिवारी और अन्य पर यूनियन के खाते से 76.50 लाख रुपये निकालने के आरोप है। इसी मामले में ओमती थाने में अपराध भी दर्ज है। हाल ही में शर्मा को जमानत मिल गई है।

बता दें कि नई कार्यकारिणी को आरपी भटनागर ने अवैध बताया था। उनकी तरफ से सविता त्रिपाठी और एसके सिन्हा द्वारा हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। जिसमें बताया था कि वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के चुनाव 2020 में हुए थे, जिसमें आरपी भटनागर को अध्यक्ष चुना गया है। उनका कार्यकाल दो वर्ष का है जो अभी खत्म नहीं हुआ है। उसके पहले ही भटनागर को छलपूर्वक इसलिए हटा दिया गया क्योंकि उन्होंने यूनियन के खाते से सदस्य रेलकर्मियों के जमा अंशदान में से 76.50 लाख् रुपये निकालने का विरोध किया था। राशि अशोक शर्मा, अनुज तिवारी व अन्य ने मिलकर निकाली है। इन पर ओमती थाने में अपराध दर्ज है। इसी बीच सीएम उपाध्याय अध्यक्ष पर पर काबिज हो गए थे। उपाध्याय व शर्मा ने कार्यकारिणी की सूची संशोधित कर ली और रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन को पेश कर दी थी। पूरा विवाद जाने बिना रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन ने उक्त कार्यकारिणी को सूचीबद्ध कर लिया था। इसी सूची को जोन ने भी परिपत्रित किया है, जो कि नियमों के खिलाफ है। इस दलील पर हाईकोर्ट ने 24 नवंबर को डब्ल्यूसीआरएमएस की कार्यकारिणी वाली सूची पर स्टे जारी कर दिया था। इसके आधार पर रेलवे ने भी उक्त सूची पर रोक लगा दी है।

नवीन सूची में जिनका नाम, उन्हें ही आपत्ति

इस पूरे घटनाक्रम में बड़ी बात यह है कि हाईकोर्ट में याचिका लगाने वाली सविता त्रिपाठी और एसके सिन्हा डब्ल्यूसीआरएमएस की नवीन सूची में उपाध्यक्ष और सहायक महासचिव है। इन्होंने अपने पद की चिंता किए बिना हाईकोर्ट में नवीन सूची को चुनौती दी थी, जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने स्टे दिया है। जानकारों का कहना है कि यदि सबकुछ नियमों के तहत होता तो नवीन सूची में शामिल दोनों हाईकोर्ट की शरण नहीं लेते।

बड़ा सवाल, आरोपितों को कैसे कर दिया परिपत्रित

भोपाल रेल मंडल के वरिष्ठ लोको निरीक्षक अशोक शर्मा और रेलकर्मी अनुज तिवारी पर ओमती थाना में धारा 420, 409 और 120 बी के तहत अपराध दर्ज था, तब भी पश्चिम मध्य रेलवे के कार्मिक विभाग के अधिकारियों ने आखिरकार किस आधार पर इन्हें सूचीबद्ध किया। रेलवे मामलों के जानकारों का कहना है कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। अपराध दर्ज होने के बाद से लेकर अब तक आरोपित रेलकर्मियों को जोन व भोपाल मंडल द्वारा लाभ देने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांची जानी चाहिए। यह घटना रेलवे पर कई सवाल खड़े करती है।

Posted By: Ravindra Soni

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