भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। प्रदेश का जैव विविधता तंत्र अच्छा है, लेकिन कथनी व करनी में अंतर जैव

विविधता से इंसानों के रिश्ते बिगाड़ रहा है। इसी का नतीजा है कि रिकार्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है। जंगल का घनापन कम हो रहा है। नदियों की अविरलता प्रभावित हुई है। तालाबों का जीवन अतिक्रमण की चपेट में फंसता जा रहा है। इन संकटों से जिस गति से उबरने की जरूरत है, वह दिखाई नहीं दे रही है। इन चुनौतियों से समय रहते नहीं निपटा गया तो जैव विविधता से रिश्ते पूरी तरह बिगड़ जाएंगे और संकट गहरा जाएगा। इंसानी जीवन पर इसके गंभीर दुष्परिणाम पड़ेंगे। विश्व जैव विधिवता दिवस पर यह चिंता विशेषज्ञों ने जताई है।

बता दें, अलग-अलग प्रकार के पौधे, पेड़ व जीव जंतुओं में पाई जाने वाली भिन्न विशेषताएं जैव विविधता

कहलाती हैं। किसी भी पर्यावरण के लिए यह तभी संभव होती है, जब वहां इन तमाम प्रजातियों के लिए अनुकूल रहवास स्थल हो। एक तरह से जैव विविधता भोजन से लेकर पर्यावरण की तमाम जरूरतों को पूरी करती है। जैव विविधता पारिस्थितिकी संतुलन को बनाकर रखती है और प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा करती है। जैव विविधता के संरक्षण के लिए पर्यावरण का संरक्षण जरूरी है। यह तभी संभव होगा, जब जल, जंगल और जमीन का संरक्षण होगा।

इसलिए बिगड़ रहे रिश्ते : प्रदेश के 36 हजार वर्ग किलोमीटर जंगल में वन बढ़ाने की योजना पर काम शुरू होना था, जो नहीं हुआ। इसके विपरीत 11 वर्ग किलोमीटर जंगल में वन घनत्व कम हुआ है। यह जैव विविधता से रिश्ते बिगड़ने का एक कारण बड़ा कारण है।

बेशक जैव विविधता संरक्षण में मप्र अव्वल है, लेकिन जब तक जल, जंगल व जमीन को बचाने के लिए सरकार की ओर न देखते हुए आम जनमानस को भी सहभागी बनना होगा। - डीपी तिवारी, पूर्व सलाहकार, जैव विविधता बोर्ड, मप्र

जैव विविधता को बनाए रखने व सुधार की दिशा में किए जाने वाले कामों को पहले ही चिह्नित किया जा चुका है, लेकिन लक्ष्यों की पूर्ति करने वाली गति कमजोर है। यह अच्छा संकेत नहीं है।

- आर श्रीनिवास मूर्ति, पूर्व सदस्य सचिव, जैव विविधता बोर्ड, मप्र

Posted By: Ravindra Soni

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