कोरोना से पीड़‍ित रहे 10 प्रतिशत मरीजों में हृदय की धड़कन भी 100 से ऊपर मिल रही है, इस कारण ज्यादा थकान और हार्ट फेल होने का खतरा भी रहता है

शशिकांत तिवारी, भोपाल। कोरोना ने ढेरों दुश्वारियां दी हैं जिनसे लोग धीरे-धीरे लोग उबर रहे हैं, लेकिन इसने दिल का दर्द भी बढ़ाया है। कोरोना के पहले हृदय रोग विशेषज्ञों की ओपीडी में आने वाले ब्लड प्रेशर के मरीजों में से नए मामले करीब 10 प्रतिशत ही रहते थे जो अब 30 प्रतिशत के करीब हो गए हैं, जो नए मरीज बढ़े हैं उनमें से 80 प्रतिशत 40 साल से कम उम्र के हैं।

हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के दौरान कुछ लोगों की नौकरी छूट गई तो कुछ को नौकरी छूटने का डर सताता रहा है, इस तनाव ने दिमाग के साथ दिल पर भी जोर डाला है। इस दौरान लोगों ने व्यायाम नहीं किया। घर में रहकर लगातार अनियमित खानपान ज्यादा होने से और कार्यशीलता कम होने मोटापा भी बढ़ गया है। इस कारण ह्दय रोग के मामले बढ़; गए हैं।

कोरोना संक्रमितों में जोखिम ज्यादा

हाई बीपी के अलावा कोरोना संक्रमित हो चुके करीब 10 प्रतिशत लोगों में पल्स रेट 100 से भी ऊपर मिल रही है, जो सामान्य तौर पर 72 रहना चाहिए। पल्स रेट ज्यादा होने से हार्ट फेल होने खतरा रहता है। जल्दी थकान होने लगती है। मनोचिकित्सक डा. सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं कि कोरोना की वजह से मानसिक रोगी लगभग दोगुने हो गए थे। एंग्जाइटी डिसआर्डर वाले मरीजों का बीपी और पल्स रेट बढ़ी हुई मिल रही है।

इनका कहना है

कोरोना से जो लोग पीड़‍ित हुए थे उनमें करीब 10 प्रतिशत लोगों की पल्स रेट ज्यादा आ रही है। इनमें ज्यादातर वह हैं जो कोरोना के चलते गंभीर रूप से बीमार पड़े थे। ओपीडी में आने वाले मरीजों में पहले करीब 10 प्रतिशत ही नए मामले होते थे अब यह आंकड़ा 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। नए मरीजों में ज्यादातर युवा है। युवाओं में यह बीमारी बहुत तेजी से बढ़ रही है सतर्क रहने की जरूरत है।

- डा, राघवेंद्र सिंह मीणा, सह प्राध्यापक, हृदय रोग विभाग, जीएमसी भोपाल

कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में पल्स रेट बहुत ज्यादा मिल रही है। इसकी तीन बड़ी वजह हैं। कोरोना का हृदय पर भी असर पड;ता है। फेफड़े को नुकसान और एंग्जायटी डिसआर्डर के चलते भी पल्स रेट ज्यादा है। कोरोना के कारण कई लोगो का डायबिटीज बढ़ गया तो इसके कुछ नए मामले भी सामने आए। इन सबके बिगड़ने की वजह से कोलेस्ट्राल और अन्य लिपिड प्रोफाइल भी बढ़ा है। ज्यादा पल्स रेट वाले मरीजों का होल्टर टेस्ट और अन्य जांचें भी सामान्य आ रही हैं।

- डा. स्वप्निल गर्दे, हृदय रोग विशेषज्ञ, भोपाल

कोरोना के बाद हाई बीपी के नए मरीज ज्यादा सामने आ रहे हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि लोग जागरूक हुए हैं। बीपी इंस्ट्रूमेंट और पल्स आक्सीमीटर अपने घर में रख लिए हैं। इससे बीमारी जल्दी पकड़ में आने लगी है। दूसरी बात मानसिक तनाव बढ़ने की वजह से भी हाई ब्लड प्रेशर के नए मरीज बढ; रहे हैं। हृदय की धड़कन ज्यादा होने के साथ तेज भी मिल रही है।

- डा. सुमित भटनागर, हृदय रोग विशेषज्ञ

ब्लड प्रेशर से बचने के लिए यह करें

- दिन भर में पांच ग्राम से ज्यादा नमक न खाएं।

- सोडियम की कम मात्रा वाला नमक खाएं।

- ऐसी चीजें ज्यादा ना खाएं जिससे मोटापा बढ़ता है, जैसे तेल, घी, शकर आदि। बाडीमास इंडेक्स 20 से 25 के बीच रखें।

- हर दिन कम से कम 45 मिनट तक तेज टहलें।

- ऊपर का बीपी (सिस्टोलिक) 130 और नीचे का बीपी (डायस्टोलिक) 80 से ज्यादा हो तो चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

- आरामपसंद जिंदगी, अनियमित खानपान, पर्याप्त नींद नहीं होने से बीपी बढ़ता है। इन सब को संतुलित रखें।

इसलिए नुकसानदायक है हाई ब्लड प्रेशर

- ब्लड प्रेशर ज्यादा होने से किडनी पर दबाव पड;ता है।

- ब्रेन स्ट्रोक का खतरा रहता है।

- आंखों की रोशनी जा सकती है।

- ह्रदय खराब होने का खतरा भी रहता है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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