सुशील पांडेय,भोपाल। स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। देश में ऐसे कई बड़े आंदोलन हुए हैं जिनमें जनजातीय नायकों ने अपने हक और देश की स्वतंत्रता के लिए अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लिया था, लेकिन इतिहास में इसका जिक्र कम ही मिलता है। उनके इसी योगदान को दर्शाने के लिए जनजातीय मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को समर्पित दस संग्रहालय मध्य प्रदेश समेत देश भर में बनाए जा रहे हैं, जिनका निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। इसके तहत मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में बादल भोई राज्य जनजातीय संग्रहालय परिसर में जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय बनाया जा रहा है, जिसमें मध्य प्रदेश के 16 जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के काम और नौ प्रमुख जनजातीय विद्रोह को प्रदर्शित किया जाएगा। यह काम ट्राइबल रिचर्स इंस्टीट्यूट (टीआरआइ), भोपाल द्वारा किया जा रहा है।

टीआरआइ के संयुक्त निदेशक नीतिराज सिंह ने बताया कि संग्रहालय का सिविल वर्क पूरा हो चुका है। अब आंतरिक साज- सज्जा का काम होना शेष है। संग्रहालय मेें जनजातीय कलाकारों द्वारा बांस शिल्प, लौह शिल्प, मृदा शिल्प और पेंटिंग के माध्यम से स्वतंत्रता सेनानियों के कार्य को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें मप्र की मुख्य जनजाति गोंड, भील,बैगा, कोरकू समुदाय के 16 फ्रीडम फाइटर के ऊपर पांच गैलरी बनाई जाएंगी। जन नायकों के बारे में जानकारी देने के लिए संग्रहालय में फिल्म, आडियो गाइड टूर, नाटक आदि का प्रदर्शन किया जाएगा। इन विद्रोहों को दर्शाया जाएगा: महाकौशल का बालदान विद्रोह, बैतूल जंगल सत्याग्रह बंजारधाल सभा, घोंडाडोंेगरी, तुरिया का घास सत्याग्रह, छिंदवाड़ा आंदोलन, चरण पादुका कांड, मंडलेश्वर क्रांति, भील भिलाला निमद क्रांति, चौर हैबा कांड।

यह 16 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शामिल: टंट्या भील, भीमा नायक, शंकर-शाह रघुनाथ शाह, रघुनाथ सिंह मंडलोई, राजा गंगाधर गोंड, बादल भोई और गंजन कोरकू, खज्या नायक, सीताराम कंवर, ढिल्लन शाह गोंड मालगुजार, राजा अर्जुन सिंह गोंड, राजा गंगाधर गोंड, आदिवासी बुचा, श्री मुका, सरदार विष्णु सिंह गोंड, सुरसी देवी भीम।

रिसर्च पर आधारित है जानकारी: नीतिराज सिंह ने बताया कि छिंदवाड़ा में पहले से मौजूद बादल भोई राज्य जनजातीय संग्रहालय परिसर में खाली पड़ी करीब नौ एकड़ भूमि पर इसका निर्माण 39 करोड़ की लागत से किया गया है। इसे पूरा करने का लक्ष्य अक्टूबर 2022 है। संभवत: दो अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे देश को समर्पित करेंगे। उन्होंने बताया कि ट्राइबल फ्रीडम फाइटर संग्रहालय के निर्माण में स्थानीय जनजातीय समुदाय के वरिष्ठ जानकर, कलाकार और इतिहासकारों से तथ्य आधारित जानकारी जुटाई गई है। गुजरात, झारखंड, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, तेलंगाना, मणिपुर, मिजोरम एवं गोवा में भी जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को समर्पित संग्रहालय बनाए जा रहे हैं।

Posted By: Lalit Katariya

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