हेमंत जोशी, भोपाल। प्रदेश में समय-समय पर लोगों द्वारा देहदान, नेत्रदान और अंगदान किए जाते हैं। इनके बारे में पढ़ने और देखने को मिलता है। इन्हीं सारे देहदान, रक्तदान और अंगदान की जानकारी को संकलित कर लोगों में जागरूकता फैलाने का काम गोविंद प्रसाद सूचिक कर रहे हैं। हरदा के गोविंद सूचिक आदिवासी विकास विभाग में भृत्य के पद पर कार्यरत हैं और पिछले 18 सालों से लगातार देहदान, अंगदान और नेत्रदान का अनूठा संकलन कर रहे हैं। इस संकलन को जिले के कई स्कूलों और शासकीय कार्यालयों में भी पहुंचा चुके हैं।

समाज में अलख जगाने के लिए गोविंद प्रसाद के इस प्रयास को दो कलेक्टरों द्वारा सराहनीय पत्र भी दिया जा चुका है। इस अनूठे संकलन की जिले के समाजसेवी भी सराहना कर चुके हैं।

अखबारों में छपने वाली खबरों से किया संकलन

गोविंद सूचिक ने बताया कि 18 साल पहले एक अखबार में अंगदान के बारे में खबर पढ़ने के बाद देहदान, नेत्रदान और अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने का मन बनाया। इसके बाद अखबारों में छपने वाली खबरों के आधार पर संकलन करना शुरू कर दिया। इसमें प्रदेश के पहले अंगदान से लेकर अब तक के सारे अंगदान, नेत्रदान और देहदान के बारे में जानकारी इकठ्ठा की है।

सूचिक ने बताया कि उनके संकलन के अनुसार अब तक प्रदेश में 3621 लोगों का अंगदान (कार्निया सहित) हो चुका है। कुल 18 सालों के दौरान समाचार पत्रों में 1950 खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं। ग्रीन कॉरिडोर के मामले में इंदौर का प्रदेश में पहला और देशभर में चौथा स्थान है। यहां 36 बार ग्रीन कॉरिडोर बन चुका है। यह सारी जानकारी उनके अनूठे संकलन में मौजूद है। प्रदेश के पहले देहदान की जानकारी भी गोविंद सूचिक के पास है, जो नीमच में हुआ था।

चार सालों में मप्र इतने अंगदान

किडनी 61 लिवर

19 हार्ट 03

(आंकड़े 2015-18 तक के हैं, इसमें कॉर्निया, स्किन और बॉडी के आंकड़े शामिल नहीं हैं।)

अब क्या है योजना गोविंद का कहना है कि लोगों को देहदान, अंगदान और रक्तदान के बारे में पता चले व सभी जागरूक बनें इसके लिए वे एक बुकलेट छपवाना चाहते हैं। इसे सभी सरकारी कार्यालयों और स्कूलों में प्रचारित किया जाए तो लोग इस बारे में सचेत होंगे। इसके लिए वे आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं, लेकिन सरकार चाहे तो यह कर सकती है।

प्रति 10 लाख लोगों में सिर्फ 0.16 ही अंगदान करते हैं

भारत में प्रति 10 लाख लोगों में केवल 0.16 लोग ही अंगदान करते हैं। यूरोप में यह आंकड़ा 27, अमेरिका में 25 और स्पेन में 35 है। भारत में प्रतिवर्ष 25 हजार अंगदान करने वालों की जरूरत है, जबकि इनकी संख्या (आंखों को छोड़कर) मुश्किल से सैकड़ों में है। सबसे अच्छी स्थिति तमिलनाडु की है। जहां हर वर्ष 80 हजार अंगदान होता है।