हरिचरण यादव, भोपाल। विदेशी हो या स्वदेशी, कछुए तो कछुए हैं। यही तो हैं जो नदी-तालाबों में प्रदूषण से लड़कर पानी को साफ-सुथरा रखते हैं और नदी तंत्र को बनाए रखने में मदद करते हैं। मप्र भी ऐसे कछुओ को पालने-पोषने में कसर नहीं छोड़ रहा है, फिर चाहे वे विदेशी ही क्यों नहीं। यहां बात वन विहार नेशनल पार्क में रखे जा रहे विदेशी कछुओं की हो रही हैं, जिन्हें तस्करों से मप्र ने वर्ष 2018 में आजाद कराया है। ये मूलत: पश्चिम अफ्रीका के सेनेगल के हैं। जिनकी पार्क प्रबंधन खूब खातिरदारी कर रहा है। इन कछुओं में से एक सदस्य की मौत हो चुकी है। तब भी सेनेगल वालों का मन नहीं पसीज रहा है। चौथा वर्ष चल रहा है, इन्होंने कछुओं को अपने देश बुलाने के लिए कोई कदम नही उठाया है। चिंता इस बात की है कि ये गर्म रहवास स्थलों में रहने के आदि हैं जिनके लिए गर्मी औ बारिश का समय तो ठीक से कट जाता है लेकिन ठंड जानलेवा होती है।

ऐसे की जा रही मेहमान नवाजी

पार्क प्रबंधन इन विदेशी मेहमानों को जिंदा रखने के लिए जी-जान लगा रहा है। अस्पताल का एक वार्ड इनके नाम कर दिया है। ठंड के सीजन में इन्हें बंद कमरे में लकड़ी की मचान पर घास की गद्दीदार सतह में पर रखते हैं। कमरे में हीटर, ब्लोअर लगाए गए हैं जो कृत्रिम गर्मी पैदा करते हैं। अधिक वाट वाले बल्व भी लगाए गए हैं।

पत्र का जवाब नहीं मिला

मप्र सरकार के माध्यम से केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इन कछुओं को उनके देश भेजने के लिए प्रयास किए हैं। नवंबर 2018 में सेनेगल से पत्राचार किया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है।

तस्करों से कराया है आजाद

तस्कर इन कछुओं को मुंबई ले जा रहे थे। जिन्हें 26 व 27 नवंबर 2018 की रात सिवनी जिले के नेशनल हाइवे से पकड़ा गया था। तब कार्रवाई स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ), पुलिस व अन्य विभागों ने की थी। बांग्लादेश के रास्ते भारत लाया गया था और दो तस्कर इन्हें सिवनी के रास्ते कोलकाता से मंुबई ले जा रहे थे।

जितनी ठंड, उतना खतरा

पार्क के डिप्टी डायरेक्टर अशेाक कुमार जैन का कहना है कि जितनी ठंड बढ़ती है, इन कछुओं के लिए उतना ही खतरा बढ़ जाता है। इनके कमरे का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास बनाकर रखना पड़ता है। वन्यप्राणी विशेष रमाकांत दीक्षित का कहना है कि मप्र तो विदेशी कछुओं की परवरिश करने की जिम्मेदारी निभा रहा है लेकिन सेनेगल वालों को भी ध्यान देना चाहिए।

कछुओं का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है, जो कर रहे हैं। समाज से भी सहयोग अपेक्षित है। विदेशी कछुओं को उनके देश भेजने के प्रयास पुन: करेंगे।

- जसबीर सिंह चौहान, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन, मप्र

Posted By: Lalit Katariya

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