-भूत पिशाच का स्वांग रच शामिल हुए शिव भक्त, भांग ने चढ़ाया भक्ति का रंग

-'हो मेरा भोला है भंडारी' गाने पर जमकर थिरके बराती

-80 मंचों से बरात का पुष्पवर्षा कर स्वागत, तोप भी चली

-बरात में 5 बड़ी झांकियां, 7 छोटे स्तर की झांकियां रहीं आकर्षण का केंद्र

-6 घंटे में दो किमी चली बरात, 6.30 बजे पहुंची इतवारा

नोट-फोटो

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

कोई भूत-पिशाच का स्वांग रच नृत्य उत्साह में डूबा था, तो कहीं बाबा बटेश्वर की शाही सवारी पर तोपों से पुष्पों की बारिश की जा रही थी। वहीं शहरवासी धूनीरथ से बाबा की भबूती लेकर माथे पर लगा रहे थे। कुछ युवा बराती शिवजी का प्रसिद्ध भंगिया प्रसाद का सेवन कर उत्साह में झूम रहे थे। यात्रा मार्ग में छतों से महिलाओं ने बाबा बटेश्वर के भव्य दर्शन कर पुष्प अर्पित किए। इधर, बरात में शामिल बाबा के नंदीश्वर रथ को धर्मप्रेमी बारी-बारी से हाथों से खींचकर मन ही मन मंत्रमुग्ध हो रहे थे। डीजे की स्वर लहरियां शिवभक्तों को नृत्य करने के लिए मजबूर कर रही थीं। बाबा बटेश्वर की शाही सवारी के पीछे सफेद बनियान और धोती पहने दो दर्जन युवक झांझ-डमरू की धुन पर भजन प्रस्तुत करते हुए चल रहे थे। आधा किलोमीटर लंबी बरात में सबसे आगे बाबा बटेश्वर की शाही सवारी और सबसे पीछे चांदी का नंदीरथ चल रहा था। यह भक्ति-श्रद्धा का अटूट दृश्य शुक्रवार को महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर पुराने शहर के कायस्थपुरा स्थित श्री बड़वाले महादेव मंदिर से निकली शिव बरात में देखने को मिला। इस बरात में हर कोई शिवजी की भक्ति के उत्साह में रंगा था। चार किमी परिक्रमा में 80 स्थानों पर मंच से भांग, फल, चाय, खीर, पानी आदि प्रसादी वितरित कर बरातियों का स्वागत किया गया। वहीं कई स्थानों पर तोप चलाकर फूलों की बारिश की गई।

शहर में पहली बार उज्जैन की तर्ज पर बाबा बटेश्वर की ऐतिहासिक रूप में बरात निकाली गई। इस बार बरात में झांझ-डमरू की अगवानी में बाबा बटेश्वर की शाही सवारी शामिल थी। उनके साथ भूत-पिशाच का स्वांग रचे बड़ी संख्या में शिवभक्त चल रहे थे। बरात की शुरुआत में मंदिर में बाबा बटेश्वर का भव्य श्रृंगार, पूजा आरती की गई। जगदीश बैंड, आनंद बैंड की सुमधुर प्रस्तुति, ढोल-नगाड़ा और डीजे के साथ सुबह 10 बजे मंदिर से बरात शुरू हुई, जो सिंधी मार्केट, जनकपुरी, हनुमानगंज, मंगलवारा से होते हुए 6.30 बजे इतवारा पहुंची। यहां स्वागत-सत्कार के बाद सराफा मार्केट, लखेरापुरा होते हुए लगभग रात 10 बजे सोमवारा चौक पहुंची। यहां मां भवानी (वधुपक्ष) के भक्तों ने शिव बरात की अगवानी की। इसके बाद वरमाला संस्कार की रस्म अदायगी निभाई गई। वरमाला संस्कार के बाद 11 बजे बरात पुनः श्री बड़वाले महादेव पहुंची। जहां महाआरती के बाद भोग-प्रसादी का वितरण किया गया। बरात में 5 बड़ी झांकियां और 7 छोटे स्तर की झांकियां शामिल थीं। इसमें शामिल भगवान राम का दरबार, होली श्रृंगार, विश्वनाथ का पहाड़ आदि झांकियां श्रद्धालुओं के मुख्य आकर्षण का केंद्र रहीं। वहीं मालवा के ढोल, बैंड, बुंदेलखंड का नृत्य दल, डमरू मजीरा पार्टी एवं ऊं नमः शिवाय जाप मंडल ने भी श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके अलावा शहर के 50 से अधिक स्थानों पर शिव बरात और बड़े स्तर पर महाशिवरात्रि महोत्सव पर कार्यक्रम किए गए।

चार किमी तक हाथ से खींचा नंदीरथ

श्री बड़वाले महादेव मंदिर से निकली बरात में सबसे पीछे चल रहे चांदी के नंदी रथ को शहर के समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों समेत अन्य श्रद्धालुओं ने चार किलोमीटर तक खींचा। रथ खींचने वालों में मंदिर समिति के संयोजक संजय अग्रवाल, प्रमोद नेमा, प्रकाश मालवीय के अलावा जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा, पूर्व महापौर आलोक शर्मा, विधायकद्वव विश्वास सारंग, रामेश्वर शर्मा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोविंद गोयल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष कैलाश मिश्रा समेत शहर के बड़ी संख्या में शामिल श्रद्धालु शामिल थे।

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नोट - इसके अलावा अन्य स्थानों से निकली बरात और शिव अनुष्ठान का समाचार भी देंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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