जिला उपभोक्ता फोरम ने दो बैंकों के मामले में सुनाया फैसला

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

जिला उपभोक्ता फोरम की बेंच-1 में दो बैंकों का मामला पहुंचा। दोनों मामलों में बैंक की गलती का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ा है। पहले मामले में इलाहाबाद बैंक ने उपभोक्ता का चैक उसके खाते में राशि होने के बावजूद बाउंस कर दिया और इसे सॉफ्टवेयर की गलती बता दिया। वहीं देना बैंक के खिलाफ मामले में उपभोक्ता से बैंक ने ब्याज की अधिक राशि ले ली और मकान की मूल रजिस्ट्री भी नहीं दी। दोनों मामलों में फोरम के अध्यक्ष आरके भावे, सदस्य सुनील श्रीवास्तव व क्षमा चौरे की बेंच ने फैसला सुनाया। फोरम ने दोनों बैंक को कड़ी फटकार लगाई और हर्जाना भी लगाया।

पहला मामला

कोलार रोड स्थित सागर इन्क्लेब निवासी अर्जुन तिवारी ने इलाहाबाद बैंक की शाखा प्रबंधक जहांगीराबाद और एमपी नगर स्थित इलाहाबाद बैंक के प्रबंधक के खिलाफ याचिका लगाई थी। उपभोक्ता के खाता में करीब 5 लाख रुपए थे, बावजूद उसका 26 हजार रुपए का चैक बैंक ने बाउंस कर दिया। इससे उपभोक्ता को शर्मिंदगी उठानी पड़ी। बैंक ने इस गलती को सॉफ्टवेयर की त्रुटि बता दिया। फोरम ने बैंक को 2 माह के अंदर 10 हजार रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय 3 हजार रुपए देने का आदेश दिया।

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दूसरा मामला

एमएएनआईटी कैंपस निवासी एनएस शर्मा ने मुख्य प्रबंधक क्षेत्रीय कार्यालय देना बैंक के खिलाफ याचिका लगाई थी। देना बैंक ने कोलार के कान्हाकुंज के मकान नंबर 25 को बेचने के लिए विज्ञापन निकाला। उपभोक्ता ने मकान खरीदने के लिए आवेदन देना बैंक में प्रस्तुत किया और उसका मूल्य 11 लाख 50 हजार रुपए लगाया। आवेदन के साथ 1 लाख 14 हजार रुपए बैंकर्स चैक भी प्रस्तुत किया। उपभोक्ता ने मकान की 25 फीसदी राशि 2 लाख 87 हजार 500 रुपए जमा कर दिए। शेष राशि 8 लाख 62 हजार जमा करने थे। उसने शेष राशि का पे-ऑर्डर केनरा बैंक के नाम से बनवा लिया, लेकिन देना बैंक ने उसे लेने से मना कर दिया। बैंक ने उपभोक्ता को मकान की मूल रजिस्ट्री नहीं दी और कहा कि मूल रजिस्ट्री की कॉपी सीबीआई के पास जब्त है। इसके बावजूद बैंक ने उपभोक्ता से 1 लाख 55 हजार 300 रुपए की अतिरिक्त ब्याज राशि ले ली। फोरम ने बैंक को आदेश दिया कि दो माह के अंदर उपभोक्ता से ली गई ब्याज राशि, मानसिक क्षतिपूर्ति 20 हजार और 5 हजार वाद व्यय राशि दें।