- ऑनलाइन मॉनीटरिंग की व्यवस्था भी हुई फेल, वेतन काटने के निर्देश हो रहे बेअसर

मंडीदीप। नवदुनिया प्रतिनिधि

एक ओर जहां भोपाल कमिश्नर के आदेश पर हमीदिया अस्पताल के लापरवाह डॉक्टरों को ज्यादा पाबंद और जिम्मेदार बनाने के लिए उनकी उपस्थिति बॉयोमेट्रिक मशीन पर दर्ज करवाई जा रही है। वहीं ऐसी ही व्यवस्था तीन साल पहले नगर के सीएचसी अस्पताल में भी लागू की गई थी। समय पर अस्पताल नहीं आने वालों की अनुपस्थिति लगाने के आदेश भी दिए गए थे। इस ई-अटेंडेंस की ऑनलाइन ही मानीटरिंग की जानी थी, लेकिन लापरवाहों पर लगाम लगाने वाला यह महत्वपूर्ण सिस्टम विभागीय जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता की भेंट चढ़ गया।

मालूम हो कि नगर के सीएचसी के डॉक्टरों के देर से आने और समय से पहले जल्दी जाने की आदत पर अंकुश लगाने के लिए विभाग द्वारा 21 अगस्त 2016 को बॉयोमेट्रिक मशीन लगाई गई थी । उस समय यहां पदस्थ छह डॉक्टर और 50 कर्मचारियों को रोजाना अंगूठा लगाकर अपनी अटेंडेंस दर्ज करानी होती थी। इस मशीन के लगने के बाद डॉक्टर और कर्मचारियों की मशीन से अटेंडेंस सुबह आठ लगती थी। कोई डॉक्टर देर से आता था और जल्दी जाता तो उनका वेतन काटने के निर्देश भी दिए गए थे। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद शुरूआती दौर में डॉक्टर समय पर अस्पताल पहुंचने लगे थे। इस व्यवस्था के लागू होने से मरीजों के लिए अधिक समय तक डॉक्टर उपलब्ध भी रहते थे। यह सिलसिला मात्र छह माह ही चल सका। इसके बाद मशीन जो खराब हुई तो उसे सुधरवाने की सुध किसी ने नहीं ली।

जन जागृति समिति के अध्यक्ष दीनू मीणा बतातें हैं कि बायोमेट्रिक मशीन से हाजिरी लगने से माना जा रहा था कि डॉक्टरों के आने जाने की मनमानी पर रोक लगेगी और व्यवस्थाओं में सुधार आएगा। इसका लाभ मरीजों को मिलेगा, लेकिन ऐसा हो न सका। एक तो डॉक्टर कम हैं ऊपर से वह कभी समय पर नहीं आते। शासन ने भले ही आठ घंटे का समय निर्धारित किया हो, लेकिन वह अपने हिसाब से आते-जाते हैं। इससे उनकी बमुश्किल चार घंटे ही सुविधा मिल पाती है। इन पर नियंत्रण रखने वाली मशीन भी लंबे समय से बिगड़ी पड़ी है।

ऑनलाइन होनी थी मॉनीटरिंग

अस्पताल में बॉयोमेट्रिक मशीन लगने के बाद इसकी मॉनीटरिंग स्वास्थ्य विभाग को करना था। मशीन में थंब लगाने वाले डॉक्टर व कर्मचारियों के समय पर अस्पताल आने-जाने के रिकॉर्ड की मॉनीटरिंग ऑनलाइन होने की व्यवस्था लागू की गई थी। खास बात तो यह है कि इस व्यवस्था को लागू करते समय इसकी ऑनलाइन मॉनीटरिंग की बात कही गई थी, लेकिन अब इस पर सवाल उठने लगे हैं। ढाई साल पहले यह सिस्टम बंद हो चुका है। इसके बाद अधिकारियों ने इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया। अभी इनकी अटेंडेंस मैन्युअल होती है, जिससे वह कभी भी रजिस्टर में साइन कर लेते हैं।

इस तरह काम करती है बायोमेट्रिक मशीन

समय पर उपस्थित होने की व्यवस्था बनाने के लिए लागू की जाने वाली बायोमेट्रिक मशीन में इंटीग्रेटेड अटेंडेंस डिवाइस सिस्टम में थ्री जी या फोर जी कनेक्टीविटी रहती है। इस मशीन की स्क्रीन पर अंगूठा लगाने के बाद अटेंडेंस दर्ज होती है।

जिम्मेदारों को जानकारी ही नहीं

इस बारे बीएमओ डॉ. केपी यादव का कहना है कि मशीन बिगड़ने की जानकारी नहीं है। केंद्र प्रभारी ने भी नहीं बताया। मशीन सुधरवाने के लिए केंद्र प्रभारी को कहा जाएगा। वहीं सीएमएचओ डॉ. एके शर्मा का कहना है कि मशीन खराब होने की मुझसे किसी ने शिकायत नहीं की है। आपने बताया है तो दिखवा लेता हूं। अटेंडेंस तो बायोमेट्रिक मशीन से ही लगवाई जाएगी।

इनका कहना है

मंडीदीप में डॉक्टरों की लेटलतीफी पर रोक लगाने के लिए बायोमेट्रिक से अटेंडेंस लगाने के सिस्टम को फिर से लागू करवाया जाएगा। इसके लिए सीएचएमओ को निर्देशित किया जाएगा।

- उमाशंकर भार्गव, कलेक्टर रायसेन