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12बीयूआर-20 : भागवत भूषण पंडित हरिकृष्ण मुखियाजी के संग्रह में रखा भागवत ग्रंथ जिसका वाचन वर्तमान पीढ़ी के युवा कथाकार आदित्यभाई कर रहे हैं।-नईदुनिया

--भागवत पूर्णिमा आज : शहर में 75 से अधिक स्थानों पर विद्यमान 200 से 350 वर्ष पुराने भागवत ग्रंथ का पूजन कर देते हैं विशेष भेंट

-ग्रंथ को सहेजकर रखने की करते हैं अपील

-पूरे शहर में पैदल भ्रमण करेंगे

युवराज गुप्ता. बुरहानपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

हिंदू धर्म की आस्था के मुख्य कें द्र बिंदु और मोक्षदाता श्रीमद् भागवत ग्रंथ को लेकर शहर में एक विशेष परंपरा का निर्वाह कि या जा रहा है। ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर में करीब 200 से 350 वर्ष पुराने अद्भुत भागवत ग्रंथ विराजमान हैं। इन प्राचीन पौराणिक भागवत ग्रंथों को सहेजकर रखने के लिए शहर के सराफा व्यापारी करीब सौ वर्षों से अनूठी परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं। इस परंपरा के तहत शहर में 75 से अधिक स्थानों पर विराजित भागवत ग्रंथों की भागवत पूर्णिमा पर विशेष पूजा कर इसके संग्रहकर्ता को विशेष भेंट दी जाती है। साथ ही संग्रहकर्ता से इसे हमेशा ऐसे ही अच्छे से सहेजकर रखने की अपील की जाती है। उसे कि सी भी कीमत पर इस महत्वपूर्ण ग्रंथ को बेचने या नदी में विसर्जित नहीं करने की समझाइश दी जाती है ताकि ये ग्रंथ हमेशा सुरक्षित रहे और भावी पीढ़ी इसके दर्शन कर इसका महत्व समझ सके । इसके पूजन के लिए शहर के 100 से अधिक छोटे-बड़े व्यापारी पूरे शहर का पैदल भ्रमण करते हैं।

इस परंपरा का निर्वाह शहर के सराफा व्यापारी कर रहे हैं। सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष उपेंद्र श्राफ, कोषाध्यक्ष व वरिष्ठ सराफा व्यापारी नरेंद्र भाई श्राफ, संतोषभाई श्राफ, दिलीप श्राफ, भागवत समिति के अध्यक्ष चंदूभाई पटेल के मुताबिक इस परंपरा का निर्वाह करीब सौ वर्षों से कि या जा रहा है। इसका उद्देश्य शहर में अलग-अलग स्थानों पर रखे श्रीमद् भागवत ग्रंथ की सुरक्षा और इसे सहेजकर रखना है। प्रतिवर्ष इन ग्रंथों के संग्रहकर्ता सराफा व्यापारियों का भागवत पूर्णिमा पर इंतजार करते हैं। अनंत चतुर्दशी के दूसरे दिन भागवत पूर्णिमा पर सराफा व्यापारी पैदल जाकर भागवत ग्रंथ की घर-घर जाकर पूजा करते हैं। भेंट राशि व पुरस्कार देते हैं। ग्रंथ को सहेजने वाले का सम्मान कर सम्माननिधि देते हैं। इसके बाद शाम को भागवत पूर्णिमा का भंडारा आयोजित करते हैं।

जैनाबाद में बने कागज पर हाथ से लिखी ग्रंथ भी मौजूद

उल्लेखनीय है कि शहर में करीब 350 वर्ष पुराने ग्रंथ हैं। इनमें से जैनाबाद में बने कागज पर हाथ से स्याही से लिखे अद्भुत व प्राचीन ग्रंथ भी मौजूद हैं। पांडुलिपी में भी वर्णित ग्रंथ है। इसके अलावा और भी सुंदर ग्रंथ हैं जो अपने आप में इतिहास को समेटे हुए हैं। भागवत भूषण पंडित हरिकृष्ण मुखियाजी ने बताया कि पांच हजार साल पहले श्राप से मुक्ति के लिए राजा परीक्षित को गंगा कि नारे सुखदेव मुनि ने भागवत कथा सुनाई थी। जिसकी शुरुआत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी से हुई थी। जो पूर्णिमा तक सुनाई गई थी। इसी उद्देश्य से इन सात दिनों में देशभर में भागवत कथाएं होती हैं। वर्तमान में भाद्रपद के शुक्ल पक्ष में भागवत कथा सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान शहर में जगह-जगह पर भागवत कथाएं हो रही हैं। युवा कथाकार आदित्य भाई मुखियाजी द्वारा भी करीब सौ वर्ष पुराने भागवत ग्रंथ से पारायण कर भागवत का महत्व बताया जा रहा है।