बुरहानपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। प्री-प्राइमरी से लेकर मिडिल स्कूल तक के मासूमों के कंधे अब बस्ते के बोझ से नहीं झुकेंगे। इसे लेकर राज्य शिक्षा केंद्र ने सख्त आदेश जारी करते हुए कहा है कि अप्रैल से शुरू होने वाले नए शिक्षण सत्र से सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में नर्सरी से कक्षा दसवीं तक सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई जाएं। निजी पब्लिशर की किताबें पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई हैं। मान्यता जारी करने वाले जिले के अधिकारियों को भी इस पर नजर रखने कहा गया है।

शिक्षा विभाग के अफसरों के अनुसार जारी निर्देशों के मुताबिक नए सत्र से अगर किसी स्कूल ने एनसीईआरटी या राज्य द्वारा निर्धारित पाठ्य पुस्तकों के अलावा अन्य किताबों का बोझ बढ़ाया तो ऐसे स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। इस संबंध में राज्य शिक्षा केंद्र की संचालक अनुभा श्रीवास्तव ने 24 फरवरी को फिर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 3 जुलाई 2019 को जारी किए गए आदेश का हवाला देते हुए संचालक लोक शिक्षण से सख्ती से कार्रवाई करने कहा है।

कक्षावार बस्तों का भार तय किया

जिला शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक स्कूल शिक्षा विभाग के उप सचिव प्रमोद सिंह ने राज्यपाल के नाम से गत तीन जुलाई को एक आदेश जारी कर कक्षावार बस्तों का भार तय कर सभी जिलों को इसका पालन कराने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के मुताबिक कक्षा एक और दो के बच्चों के बस्ते का भार डेढ़ किलो से अधिक नहीं होना चाहिए। इसी तरह कक्षा तीन से पांच का भार दो से तीन किलो, कक्षा छह से सात का चार किलो, कक्षा आठ से नौ का साढ़े चार किलो और कक्षा दसवीं का बस्ता पांच किलो से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही प्राथमिक स्तर की कक्षाओं खासकर एक व दो के विद्यार्थियों को होमवर्क नहीं देने के निर्देश भी हैं।

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डीईओ कार्यालय में बनेगा कंट्रोल रूम

राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी निर्देश के परिपालन में जिला शिक्षा अधिकारी ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। हालांकि अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र से पहले मार्च में बोर्ड परीक्षाओं को लेकर काफी व्यस्तता रहेगी। बावजूद इसके डीईओ ने सत्र से पहले अपने कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश दिए हैं। यहां एक टेलीफोन के साथ एक कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाएगी जो इससे जुड़ी शिकायतों को दर्ज करेगा। साथ ही इस मुद्दे को लेकर बहुत जल्द जनशिक्षकों, बीआरसी आदि की बैठक भी बुलाई जा रही है। निजी पब्लिशरों की किताबों और बस्तों के भार की मॉनीटरिंग के लिए भी दल गठित की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

भाऊ वेलफेयर फाउंडेशन ने कलेक्टर से की शिकायत

प्रतिबंध के बावजूद जिले के निजी स्कूलों द्वारा प्राइवेट पब्लिशर्स की पुस्तकें चलाने, बार-बार ड्रेस बदलने, बाजार में नहीं मिलने वाले कपड़े को ड्रेस कोड बनाने और मनमाने दामों पर बेचने तथा मनमाने तरीके से फीस वृद्धि को लेकर मंगलवार को भाऊ वेलफेयर फाउंडेशन ने कलेक्टर से शिकायत की है। फाउंडेशन के अध्यक्ष राजेश भगत व अन्य ने कहा है कि निजी स्कूलों की इस मनमानी से अभिभावक खासे परेशान हैं। इस पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।

-राज्य शिक्षा केंद्र के आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाएगा। नर्सरी से दसवीं तक की कक्षाओं में अब निजी व सरकारी स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें ही चलानी होंगी। इस संबंध में दल भी निरीक्षण करेंगे और कार्यालय में एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जाएगा। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित स्कूल की मान्यता निरस्त की जाएगी। -अतीक अली, जिला शिक्षा अधिकारी

Posted By: Nai Dunia News Network