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29बीयूआर-23 :-सभा में आए लोगों के हाथ सैनिटाइज कराए गए।-नईदुनिया

-चुनावी जागरूकता मंच ने किया था आयोजन, रैली में लगाए नारे

बुरहानपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मतदान से पहले चुनावी जागरूकता मंच द्वारा गुरुवार को नेपानगर के आंबेडकर चौराहे के पास आदिवासियों की चौपाल लगाई गई। इस चौपाल में भाजपा और कांग्रेस सहित सभी छह प्रत्याशियों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन अधिकांश प्रत्याशी इसमें नहीं पहुंचे। इसकी जगह उन्होंने अपने प्रतिनिधि भेजे थे। जिस पर चौपाल में मौजूद आदिवासी मतदाताओं ने सवाल उठाया कि आखिर राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी जनता के सवालों का जवाब देने से क्यों डर रहे हैं। इस दौरान शिक्षा के निजीकरण, बढ़ती बेरोजगारी और पलायन, वन कटाई, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, किसानों को उपज के सही दाम नहीं मिलने और वन अधिकार पट्टे जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए। इससे पहले आदिवासियों ने नेपानगर थाने के पास से अंबेडकर चौराहे तक रैली भी निकाली, जिसमें मुद्दों को लेकर नारे भी लगाए गए।

इन मुद्दों पर किए सवाल

आदिवासी मतदाताओं ने पूछा कि रोजगार की तलाश में गांव खाली हो रहे हैं। जब रोजगार के लिए लोग महाराष्ट्र व गुजरात की सरकारों के भरोसे हैं तो मप्र में चुनाव का क्या औचित्य। बेरोजगारों के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी। शांताबाई ने पूछा कि लकड़ी तस्कर खुलेआम आरा मशीनों से जंगल काट रहे हैं। वनकर्मियों की साठगांठ सामने आने के बाद भी कोई कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई जबकि निर्दोष आदिवासियों पर वन अमला अत्याचार कर रहा है। कुछ मतदाताओं ने पूछा कि वन अधिकार अधिनियम लागू होने के तेरह साल बाद भी आदिवासियों को पट्टे देने में शासन-प्रशासन की दिलचस्पी क्यों नहीं है। जिले के 11 हजार दावों में से सिर्फ 54 का ही अब तक निराकरण हुआ है। प्रत्याशियों से पूछा गया कि दो साल में 20 हजार से ज्यादा स्कूल बंद हो चुके हैं। करीब एक लाख शिक्षकों के पद खाली हैं। बावजूद इसके सरकारी की रुचि शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर नहीं है। ऑनलाइन पढ़ाई व्यवस्था के चलते ग्रामीण और गरीब छात्र शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। इसके अलावा मक्का पर समर्थन मूल्य नहीं मिलने और क्षेत्र में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सवाल किए गए।

जनता के हाथ में माइक नहीं चाहते

चुनावी जागरूकता मंच की आयोजक और जागृत आदिवासी दलित संगठन की प्रमुख माधुरी बेन सहित अन्य पदाधिकारियों ने भाजपा उम्मीदवार सुमित्रा कास्डेकर और कांग्रेस उम्मीदवार रामकिशन पटेल, बसपा प्रत्याशी भलसिंह बारेला, वंचित बहुजन अघाड़ी पार्टी के प्रत्याशी अजय बांडेकर आदि की गैरमौजूदगी पर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि उम्मीदवार सिर्फ उन्हीं सभाओं में जाना चाहते हैं जहां उनके हाथ में माइक हो। वे ऐसी जगह जाने से बचते हैं जहां माइक जनता के हाथ में होता है। यह राजनीतिक दलों और लोकतंत्र की दुर्दशा को दर्शाता है

Posted By: Nai Dunia News Network

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