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16बीयूआर-26 :-हाथों में बैनर लिए काफी संख्या में मौजूद आदिवासियों ने कोरोनाकाल के नियमों का पालन नहीं किया। -नईदुनिया

-नारेबाजी कर पात्र लोगों को वनाधिकार पत्र देने की मांग, एक आदिवासी की गिरफ्तारी पर आक्रोश

-फिर गीत गाकर शुरू किया आंदोलन, बुरहानपुर से पहुंचा पुलिस बल

नेपानगर (नईदुनिया न्यूज)। जाग्रत आदिवासी दलित संगठन के माध्यम से एक बार फिर आदिवासियों ने पुलिस को घेरना शुरू कर दिया है। आदिवासियों ने इससे पहले दो बार थाने का घेराव किया था। इस बार एसडीओपी कार्यालय को घेर लिया। दो स्थानों से आदिवासी रैली के रूप में यहां पहुंचे थे। पहली रैली गेस्ट हाउस से निकली तो दूसरी मनोज टॉकीज क्षेत्र से होते हुए एसडीओपी कार्यालय आई। इसमें सीवल, मांडवा, बदनापुर, डवाली, नावथा, हसनपुरा, झांझर, असीरगढ़ सहित अन्य गांवों के आदिवासी शामिल रहे। एसडीओपी कार्यालय का घेराव करने के बाद आदिवासियों ने कहा कि वन विभाग ने कैलाश जमरे नामक व्यक्ति को पकड़ा था। उन्हें छोड़ा जाना चाहिए। साथ ही जिन वनकर्मियों, रेंजर ने पकड़ा उनकी गिरफ्तारी की जाए नहीं तो हमें भी गिरफ्तार करें। इस दौरान वह पूरे समय भजन, आदिवासी गीत गाते रहे। वहीं पुलिस विभाग ने स्थिति को देखते हुए बुरहानपुर से अतिरिक्त बल बुलाया है।

जेल भरो आंदोलन दिया नाम, अपहरण और मारपीट का आरोप

शाम में आदिवासी संगठन की ओर से बयान जारी किया गया। आंदोलन को जेल भरो आंदोलन का नाम दिया गया। साथ ही कहा गया कि अपहरण और मारपीट के जिम्मेदार वन विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। बुरहानपुर वन विभाग द्वारा 29, 30 अगस्त को वनाधिकार दावेदारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से कोर्ट और रास्ते से उठाया गया। बाद में उन्हें रेंज ऑफिस में बंधक बनाया गया। जो कि गैर कानूनी है। वन विभाग अवैध कटाई करने वाले लोगों को नहीं पकड़ रहा है। मुख्यमंत्री पट्टे बांटने की बात कह रहे हैं तो वहीं वन विभाग अडंगा डाल रहा है। बुरहानपुर जिले में ऑनलाइन 11 हजार दावों में से केवल 54 जिला स्तर तक पहुंचे हैं। आदिवासियों ने गीतों और भाषण के माध्यम से चेतावनी दी कि अगर आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा नहीं की जाती तो आगामी विधानसभा चुनाव में वोट मांगने न आएं।

शारीरिक दूरी की उड़ी धज्जियां, मूकदर्शक बना अमला

रैली और आंदोलन में आदिवासी समूह में नजर आए। इस दौरान पूरे समय कोरानाकाल के नियमों का पालन नहीं हुआ। शारीरिक दूरी के नियम की धज्जियां उड़ी जबकि इस समय कोरोना संक्रमण का दौर चल रहा है, लेकिन ऐसे में पुलिस और प्रशासन पूरी तरह असहाय नजर आया। आदिवासी पूरे समय समूह में ही नजर आए। ऐसे में आने वाले समय में कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई।

यह भी कहा

-अंतराम अवासे ने कहा वन विभाग गुंडागर्दी कर रहा है। किसी को भी रोककर मारा-पीटा जा रहा है। गैरकानूनी तरीके से बंधक बनाया जा रहा है। एक को मारने की बजाय हमें एक साथ मार दो। हम यहां गिरफ्तारी देने आए हैं। आषा बाई ने कहा जब तक मांग पूरी नहीं होगी तब तक यहां बैठेंगे। प्यारसिंह वास्कले और कैलाश जमरे को कोर्ट से वन विभाग ने खकनार रेंज में मारपीट की। यह गलत है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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