बुरहानपुर/नेपानगर/धाबा/डोईफोड़िया। (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मां शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्र की नवमी पर शहर सहित अंचल में जगह-जगह हवन पूजन व भंडारे हुए। कन्याओं का पूजन किया गया। मातारानी से कोरोना महामारी के निवारण के साथ सभी के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की गई।

शहर में छोटे-बड़े करीब 100 पंडालों में विराजित माता की मूर्तियों का पूजन कर हवन पूजन किया गया। देवी मंदिरों में आस्था के मेले लगे। माता का आकर्षक श्रृंगार व पूजन किया गया। जगह-जगह कन्यापूजन किया गया। भंडारों में हजारों भक्तों ने प्रसादी पाई। सुबह से शाम तक मातारानी के जयकारे गूंजते रहे।

देवी मंदिरों में उमड़ी आस्था

क्षेत्र के प्रसिद्ध मां इच्छादेवी, मां रेणुका देवी, मोती माता, वाघेश्वरी देवी, भवानी माता, आशापुर देवी माता के दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की कतारें लगी। सुबह से रात तक दर्शनों का सिलसिला जारी रहा।

ग्रामीण क्षेत्रों में कन्या पूजन के बाद हुआ भंडारा

नेपानगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों मे नवरात्रि पर्व की नवमीं पर कन्या पूजन का कार्यक्रम आयोजित हुआ। साथ ही भंडारा भी हुआ। ग्राम ग्राम सारोला में नवरात्र पर कन्या भोज की पूजा अर्चना की गई। अंतिम दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। व्रत रखने वाले भक्त कन्याओं को भोजन कराने के बाद ही अपना व्रत खोलते हैं। कन्याओं को देवी मां का स्वरूप माना जाता है। सारोला के मधुकर महाजन नें बताया कि इस दिन कन्याओं को भोजन कराने से घर में सुख, शांति और सपंन्नाता आती है। कन्या भोज के दौरान नौ कन्याओं का होना आवश्यक होता है। इस बीच यदि कन्याएं 10 वर्ष से कम आयु की हो तो जातक को कभी धन की कमी नही होती और उसका जीवन उन्नातशील रहता है। पंडित राजू जोषी के अनुसार श्रीमद् देवी भागवत के अनुसार नवरात्र पर कन्या पूजन के लिए कम से कम दो वर्ष की कन्या हो तो अच्छा रहता है। क्योंकि इससे छोटी कन्या भोजन ग्रहण नहीं कर सकती। कन्या पूजन नवमी के दिन करना सबसे अच्छा माना जाता है। दो साल की कन्याओं का पूजन करने से घर में कभी धन की कमी नहीं होती। इससे दरिद्रता भी दूर होती है। इसी तरह तीन वर्ष की कन्या का पूजन करने से घर में धन.सम्पत्ति में वृद्धि होती है। तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति का स्वरूप भी माना जाता है। इस दौरान भंडारा भी किया गया।

56 भोग लगाया, गरबा कर ली मतदान की शपथ

बुरहानपुर के इतवारा के श्री गोकुलचंद्रमाजी मंदिर में यमुना मैया को 56 भोग लगाया गया। गरबा कर माता की आराधना की गई। माता की महाआरती कर खुशहाली व सुख समृद्धि की कामना की गई। वहीं गरबा के बाद महिला-पुरुषों ने मतदान की भी शपथ ली। भागवत भूषण पंडित हरिकृष्ण मुखियाजी ने नवरात्र उत्सव का महत्व बताया। गुड्डूभाई मुखियाजी ने बताया कि दशहरे पर श्री ठाकुरजी को तिलक किया जाएगा। विशेष श्रृंगार होगा।

ताजनापुर में भक्तिमय होकर माता का किया विसर्जन

डोईफोड़िया क्षेत्र के ताजनापुर में नवमी पर विसर्जन के दिन भंडारे का आयोजन किया गया। हजारों लोगों ने भंडारे में प्रसादी ली। शाम सात बजे माताजी के चल समारोह में पूरे गांव के लोग शामिल हुए। भक्तों ने माता के सामने गरबा नृत्य किया। माताजी का विसर्जन कर सभी ने देश के लिए सुख शांति समृद्धि की कामना की। वहीं ग्राम धाबा में भी माता की मूर्ति का चल समारोह निकाला गया। मूर्ति को धूमधाम से विसर्जन के लिए ले जाया गया। माता के जयकारे गूंजे।

हवन कर भंडारे का हुआ आयोजन

ग्राम डोइफोड़िया में नवदुर्गा उत्सव की नवमीं पर हवन के साथ महाप्रसादी का वितरण हुआ। ग्रामीणों ने माता का धूमधाम से विसर्जन भी किया। ग्रामीणों ने माता की उपासना कर माता की प्रतिदिन आरती की। प्रसाद का लाभ लिया। पूरा गांव भक्तिमय हुआ। जिसमें महिला, पुरुष, बच्चे सभी शामिल थे। पंडित योगेश बारपांडे ने माता की विधि विधान से मंत्रोचार के साथ पूजा अर्चना की। माता को छह वर्षों से चांदी के मुकुट, नथनी, हार, तलवार तथा अन्य सभी आभूषण से सजाया जा रहा है। प्रतिदिन यहां 10 किलो की माला खंडवा से आती थी। भक्तों ने माता के सामने गरबा नृत्य किया। माता का विसर्जन कर सभी ने देश के लिए सुख शांति समृद्धि की कामना की।

Posted By: Nai Dunia News Network

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