संदीप परोहा, बुरहानपुर। बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा बुधवार को जिलेभर में धूमधाम से मनाया जाएगा। इसी दिन रावण का अंत कर भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय पाई थी। इसलिए इसे विजयादशमी भी कहा जाता है। भगवान श्रीराम से जुड़े इस पर्व को बुरहानपुर जिले के लोग इसलिए भी धूमधाम से मनाते हैं, क्योंकि भगवान श्रीराम से बुरहानपुर का गहरा नाता है। चौदह साल के वनवास के दौरान जब वे असुरों का नाश करते हुए आगे बढ़ रहे थे, तो कुछ समय उन्होंने जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में भी बिताया था। ताप्ती पुराण सहित कई पौराणिक और ऐतिहासिक ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है।

श्रीराम झरोखा मंदिर के महंत स्वामी नर्मदानंद गिरि महाराज बताते हैं कि भगवान श्रीराम ने खर-दूषण नाम के दो असुरों का अंत करने के बाद बुरहानपुर के जंगलों में रहे और नागझिरी घाट के पास स्थित श्रीराम झरोखा मंदिर घाट से ताप्ती नदी पार कर आगे की यात्रा पर निकले थे। इस दौरान ताप्ती तट पर उन्होंने अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्घ भी किया था।

इन स्थानों में हैं प्रमाण

जिले के ठाठर बलड़ी गांव के पास जंगल में आज भी मानव निर्मित पत्थर की गुफा है, जहां सालभर झरने से पानी गिरता है। मान्यता है कि यह गुफा भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने अपने निवास के लिए बनाई थी। माता सीता के स्नान के लिए जलस्रोत नहीं होने पर लक्ष्मण जी ने बाण चलाकर पत्थरों में झरना बना दिया था। नेपानगर के पास सीता नहानी में भी कुछ इसी तरह के प्रमाण हैं। इसके अलावा श्रीराम झरोखा मंदिर और जम्बूपानी में मौजूद मानव निर्मित गुफाएं भी प्रमाण के तौर पर देखी जाती हैं। किंवदंती है कि जम्बूपानी में जामवंत जी का निवास था और हनुमान जी उनसे यहीं मिलने आते थे।

श्रीराम वन गमन पथ में शामिल करने प्रशासन ने लिखा है पत्र

भगवान श्रीराम से गहरा नाता रखने के बावजूद अब तक सरकारी दस्तावेजों में श्रीराम वन गमन पथ के नक्शे पर बुरहानपुर का नाम दर्ज नहीं किया गया है। इसमें नाम जोड़ने के लिए कलेक्टर प्रवीण सिंह ने विभिन्न धार्मिक संगठनों, सामाजिक संगठनों आदि की मंशा के अनुरूप शासन को पत्र लिखा है। इसके साथ कुछ प्रमाण भी भेजे गए हैं। हालांकि अब तक शासन की ओर से स्वीकृति अथवा अस्वीकृति संबंधी जवाब नहीं आया है। मंगलवार को सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल व अन्य नेता भी पवित्र स्थल श्रीराम झरोखा मंदिर में आशीर्वाद लेने पहुंचे। महंत नर्मदानंद गिरि महाराज ने राम वन पथ गमनके संबंध में भी चर्चा की है।

बुरहानपुर का भगवान श्रीराम से गहरा नाता है। जिले के चार स्थानों पर उनकी मौजूदगी के प्रमाण मिलते हैं। इसलिए जिले को राम वन गमन पथ की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। - कमरुद्दीन फलक, इतिहासकार

Posted By: Nai Dunia News Network

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