- रात में 12 बजे हुई मूसलधार बारिश से भगवान शिव की जटाओं से बह निकला दूधिया पानी का झरना

अब्बास अहमद. छतरपुर। बुंदेलखंड के केदारनाथ जटाशंकर धाम में भगवान भोलेनाथ का अभिषेक प्रकृति ने अमृत से किया। दरअसल 15 अगस्त की भोर में रात 12 बजे हुई मूसलाधार बारिश से जटाशंकर धाम में नजारा बिल्कुल हिल स्टेशन जैसा हो गया। यहां भोलेनाथ की जटाओं से वैसे तो 12 महीने झरना बहता है, लेकिन मूसलाधार बारिश ने इसे और विहंगम बना दिया। रात के समय बना यह नजारा देखते ही बनता है। धाम परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में यह नजारा कैद हुआ है। विंध्य पर्वत श्रंखला स्थित प्रसिद्ध तीर्थ पर्यटन स्थल जटाशंकर धाम अलौकिक, भौगोलिक रूप से बिल्कुल हिल स्टेशन का असास कराता है।

श्री जटाशंकर धाम न्यास के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल बताते हैं कि रविवार-सोमवार दरमियानी रात में अचानक से तेज मूसलाधार बारिश हुई। इससे आजाद के अमृत महोत्सव स्वतंत्रता दिवस की भोर में जटाशंकर धाम िस्थत भगवान भोलेनाथ का प्रकृति ने बारिश रूपी अमृत से अभिषेक किया है। श्री अग्रवाल ने बताया कि नजारा इतना मनभावन होता है कि इससे नजर नहीं हटती है। भोर में हुए इस अभिषेक के दौरान मंदिर में श्रद्वालु नहीं थे। ऐसे में इस अमृत रूपी प्राकृतिक झरने से किसी को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। यहां बता दें, इससे पहले जुलाई माह में भी जटाशंकर धाम में बारिश के दौरान हिल स्टेशन सा नजारा बन गया था, लेकिन स्वतंत्रता दिवस की भोर का नजारा बिल्कुल अलग सा नजर आया। मानाे प्रकृति स्वयं भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर आजादी के अमृत महोत्सव को मना रही है।

ऐसे होता है बारिश में अभिषेक:

अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने बताया जटाशंकर धाम पहाड़ी के मध्य स्थित है। इसके तीन और पहाड़ हैं। यहां बारिश होने से तीनों पहाड़ों का पानी शिव धाम की सीढ़ियों और गो मुख के झरने से आता है। इससे यहां बारिश में नजारा अद्भुत हो जाता है। खुद प्रकृति भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करती है। तेज बारिश होने से यहां नजारा किसी हिल स्टेशन या बड़े झरने की तरह दिखता है। बारिश के मौसम में यहां प्रकृति के अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य, प्रकृति के श्रृंगार को निहारने के लिए लोग लालायित रहते हैं।

यह है जटाशंकर धाम की महिमा:

जटाशंकर धाम छतरपुर मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर है। यह स्थान चारों तरफ से विंध्य पर्वत श्रंखला के पर्वतों से घिरा है। पर्वत से जटाओं की तरह बहने वाली जलधाराएं ऐसी दिखती हैं, जैसे भगवान शिव की जटाओं से गंगा बह रही हो। बहती जलधारा से इसका नाम जटाशंकर है। अमरनाथ की तरह इस स्थान की खोज एक चरवाहे ने की। गुफा में भगवान शिव का मन्दिर है। मंदिर में तीन छोटे-छोटे जल कुंड हैं, जिनका जल कभी खत्म नहीं होता। इन कुंडों के पानी का तापमान हमेशा मौसम के विपरीत होता है। ठंड में पानी गर्म और गर्मी में शीतल। मान्यता है कुंड के पानी से स्नान से कई असाध्य रोग खत्म हो जाते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन से पहले कुंड के पानी से स्नान जरूर करते हैं।

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