बिजावर। दहेज के लिए पत्नी को प्रताड़ित करने के मामले में न्यायाधीश मनीष शर्मा की अदालत ने आरोपित को दोषी करार देकर 10 साल की कठोर कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियोजन कथा के अनुसार 13 मई 2016 को फुलिया सौर निवासी मझगुवांकला ने थाना सटई में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके लड़के विनेश की पत्नी प्रभाबाई ने घर में फांसी लगा ली। रिपोर्ट पर थाना प्रभारी सटई ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। जांच के दौरान मृतका के माता-पिता ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी विनेश उर्फ नोनेलाल सौर से की थी। विवाह के कुछ समय बाद पति बाइक व 50 हजार रुपए की मांग करने लगा। मांग पूरी न होने पर मृतका से मारपीट कर प्रताड़ित किया जाने लगा। पति की प्रताड़ना से तंग आकर ससुराल में प्रभाबाई ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सटई पुलिस ने आरोपित के खिलाफ केस दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया। अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक अजय मिश्रा ने पैरवी करते हुए पक्ष रखा। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश मनीष शर्मा की अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर पति विनेश उर्फ नोनेलाल सौर को दोषी ठहराते हुए आईपीसी की धारा 304बी में 10 वर्ष का कठोर कारावास के साथ 1 हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई है।

मारपीट कर आंखों में मिर्ची पाउडर डालने वाले को सुनाई सजा

राजनगर। शादी समारोह में मारपीट कर आंखों में मिर्च का पाउडर डालने के मामले में जेएमएफसी राजनगर विनय कुमार तिवारी की कोर्ट ने आरोपित को दोषी ठहराते हुए 6 माह की कठोर कैद व जुर्माना की सजा सुनाई है।

अभियोजन कथा के अनुसार फरियादी कोमल अहिरवार ने 17 जून 2017 को थाना राजनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 16 जून 2017 को रात के करीब 11ः30 बजे उसके घर के बगल में पप्पू पुत्र खेता अहिरवार की शादी में कोमल से वादविवाद करते हुए अजय पाल ने लाल मिर्च पाउडर उसकी आंखों में डाल दिया और डंडे से पीटा। राजनगर पुलिस ने जांच के बाद मामला न्यायालय में पेश किया था। अभियोजन की ओर से एडीपीओ कैलाश नारायण परिहार ने पैरवी करते हुए कोर्ट में सबूत पेश किए। न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी विनय कुमार तिवारी की कोर्ट ने आरोपित अजय पाल पुत्र पृथ्वी पाल को दोषी पाकर धारा 324 में छह माह की कठोर कैद एवं 2000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।

जीवन अमूल्य है, इसे जीने का तरीका आना चाहिएः पं. कौशिक

छतरपुर। चेतगिर कॉलोनी के श्री हनुमान मंदिर में चल रही भागवत कथा में अंतिम दिवस बुधवार को आचार्य भगवती प्रसाद कौशिक ने कहा कि जीवन अमूल्य है। इसके जीने का तरीका आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सुख-दुख जीवन का जोड़ा है, गरीबी-अमीरी भगवान की देन है। हमारे कर्म भी इसके साथ जुड़े हैं। दुष्कर्मों के कारण जीव को अनेक प्रकार के कष्ट भोगने पड़ते हैं। श्री सुदामा जी के जीवन की कुछ ऐसी ही परिस्थिति थी कि गुरु मां के द्वारा दिए गए चने सुदामा जी ने अकेले ही खाए, जिस कारण उन्हें गरीबी जैसी विपत्ति का सामना करना पड़ा। पं. कौशिक ने कहा कि किसी दूसरे के हक पर किसी दूसरे का अधिकार नहीं है। गुरु मां ने सुदामा को चने देकर कहा था कि इस प्रसाद को दोनों भाई मिलकर लेना पर सुदामा तो भूख से व्याकुल थे। इसलिए उन्होंने बिना कृष्ण को बताए चने खा लिए। जब गुरु मां को इस बात का पता चला तो उन्होंने सुदामा का निर्धन होने का श्राप दे दिया। इस श्राप को सुनकर उनके मित्र कृष्ण दुखी हुए। गुरुदेव श्रीकृष्ण की भावों को देखकर समझ गए और वे सुदामा को आशीर्वचन देते हुए बोले शिष्य चिंता मत करो। जब तुम द्वारिकाधीश की शरण में जाओगे तो तुम गुरु मां के इस श्राप से मुक्त हो जाओगे। श्री कौशिक जी कहते हैं कि सुशीला के प्रेरणा से जब सुदामा जी अपने मित्र श्रीकृष्ण के यहां मिलने पहुंचे तो कान्हा ने उन्हें अपने गले से लगाकर गुरु मां के श्राप से मुक्त किया। आचार्य श्री कहते है कि जीवन में मनुष्य को गुरु की उतनी ही आवश्यकता होती है जितनी शिशु को माता-पिता की। सच्चे गुरु के द्वारा ही मानव जीवन सफल होता है। बताया गया हैे कि गुरुवार को सुबह हवन-पूजन के पश्चात विशाल भण्डारा होगा, जिसमें प्रसाद पाने के लिए सभी भक्तजन पधारने का आग्रह किया गया है।

नोट- फोटो 37 लगाएं के प्सन है-

छतरपुर। कथा सुनाते कथा व्यास।-37

Posted By: Nai Dunia News Network