- वायु व ध्वनि प्रदूषण कम होने से लोगों को मिली राहत

छतरपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए जिले में जारी लॉकडाउन से शहर की आबोहवा साफ हो गई है। वायु और ध्वनि प्रदूषण कम हो जाने का असर पर्यावरण भी साफ दिखाई दे रहा है।

लॉकडाउन से शहर सहित पूरे जिले की आबोहवा साफ हो रही है। एक हफ्ते से कम वाहनों के चलने और धूल न उड़ने के कारण पर्यावरण में काफी सुधार होने का एहसास होने लगा है। वायु प्रदूषण काफी हद तक खत्म हो गया है। इसके साथ ही ध्वनि प्रदूषण भी पूरी तरह से बंद हो गया है। ऐसे में सुबह से शाम तक चिड़ियों की चहचहाहट और अन्य पक्षियों का कलरव भी सहज रूप से सुनाई देने लगा है।

दरअसल लॉकडाउन के कारण सभी तरह की निर्माण गतिविधियां पूरी तरह से बंद हो गई हैें। सड़कों पर वाहनों के संचालन में करीब 85 फीसदी कमी आ जाने से डीजल पेट्रोल के जलने से निकलने वाला धंआं भी बंद है। वाहनों की आवाजाही न होने से सड़कों से अब धूल के गुबार नहीं उठ रहे हैं। इस कारण हवा साफ हो जाने से लोगों को सांस लेने में आसानी हो रही है। पर्यावरण विभाग के मुताबिक इस समय छतरपुर शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स 50 एक्यूआई से कम हो गया है, जो सेहत के लिए पूरी तरह से सही माना जाता है। उल्लेखनीय है कि इस लॉकडाउन के कारण शहर की आबोहवा में आज से करीब 40 साल पहले की आबोहवा जितना सुधार हो गया है। अन्यथा वाहनों की आवाजाही से धुआं व धूल सहित शोर के कारण लोगों के लिए खुली हवा में राहत भरी सांस लेना और सहज रूप से हल्की ध्वनि सुनना भी आसान नहीं था।

लोग हुए शाकाहारी

लॉकडाउन का सीधा असर लोगों के खानपान और तमाम शौकों पर भी पड़ा है। कोरोना के डर से बड़ी संख्या में लोगों ने मांसाहार से तौबा कर ली। इतना ही नहीं अब तो लॉकडाउन की अवधि में देशी विदेशी मदिरा की दुकानों में भी ताले पड़ जाने से शाम होते ही इन दुकानों की ओर खिंचने वालों ने भी नशे से दूरी बना ली है। बाजार बंद होने से लोगों को आसानी से तंबाकू गुटखा भी नहीं मिल रहे हैं। लोग घरों में ही लॉकडाउन होकर शाकाहार को अपना रहे हैं। कि सी भी तरह के नशे की बजाय चाय-कॉफी से ही काम चलाने लगे हैं। जिससे काफी हद तक जीवन शैली में गुणात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इस सुधार से सामाजिक स्तर पर काफी बदलाव भी दिखाई देने लगे हैं।

इनका कहना है

लॉकडाउन से लोगों की जीवन शैली पर अच्छा प्रभाव पड़ रहा है। लोगों की दिनभर की भागदौड़ व आपाधापी थमने से घरों में पहले की तरह ड्राइंग रूम में पूरा परिवार जमा होकर आनंद ले रहा है। धूल व धुआं से निजात मिलने से अब सांस लेने में भी आनंद की अनुभूति होने लगी है।

सुरेखा श्रीवास्तव

शिक्षिका, छतरपुर

लॉकडाउन से भले ही कुछ जटिलताएं देखने को मिली हों पर सही मायने में इसके कारण सड़कों पर वाहनों का संचालन थमने से ध्वनि व वायु प्रदूषण के स्तर में काफी सुधार साफ दिखाई देने लगा है। सामाजिक स्तर पर काफी बदलाव नजर आ रहे हैं।

सीमा अग्रवाल

गृहणी, छतरपुर

इन दिनों कोरोना के डर के कारण पाबंदियों के कई तरह से सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। लोगों को पूरे परिवार के साथ बैठने का समय मिला है। शाकाहार को अपनाया जाने लगा है और नशे पर अपने आप रोक लग गई है। ये अपने आप में बड़ी बात है।

संध्या खरे

गृहणी, छतरपुर

नोट- फोटो 21, 22, 23, 24 का कै प्सन है-

छतरपुर। लॉकडाउन में सूने पड़े शहर के रास्ते।-21

छतरपुर। सुरेखा श्रीवास्तव।-22

छतरपुर। सीमा अग्रवाल--23

छतरपुर। संध्या खरे।-24

गरीबों के लिए खुली रसोई, भूखों को दिया जा रहा भोजन

छतरपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

देश में लॉकडाउन होने बाद महानगरों से पलायन कर अपने घरों की ओर पैदल जा रहे परिवारों और रोजी रोटी का जरिया बंद हो जाने से घरों में कैद लोगों की भूख मिटाने के लिए जगह-जगह युवा समाजसेवी आगे आए हैं। गरीबों के लिए रसोई खोल दी गई हैं, जहां से भूखों को भोजन कराया जा रहा है।

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन के कारण रोज कमाने खाने वाला एक बड़ा तबका और मजदूरी करके परिवार के लिए रोटी जुटाने वालों के सामने पेट की भूख मिटाने का संकट आ गया है। वहीं हजारों की संख्या में मजदूर शहरों से पलायन करके गांवों को लौट रहे हैें। उनके सामने भी भूख एक बड़ी समस्या है। ऐसे विकट हालातों में कई युवा समाजसेवी व कई संस्थाएं आगे आई है। जो अपने अपने तरीके से प्रबंध करके भूखों को रोटी का निवाला देने सड़कों पर निकल पड़े हैं। खास बात ये है कि इनके साथ हर रोज लोग कि सी न कि सी तरह से जुड़कर पीड़ित मानवता की सेवा से जुड़ते जा रहे हैं।

हरपालपुर में सेवा से जुड़ते जा रहे मददगार

हरपालपुर कस्बे में श्रीराम सेवा समिति के सदस्यों द्वारा असहाय, गरीब, जरूरतमंद और महानगरों से पैदल यात्रा करके अपने गांव लौट रहे लोगों के लिए रसोई खोली गई है। इस रसोई से दिन-रात भोजन के पैकेट बना कर भूखों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

समिति के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह पायक ने बताया कि उन्होंने व्हाट्सएप पर एक ग्रुप बनाया है जिसके माध्यम से उनके पास भूखे लोगों की जानकारी आती है और उनकी टीम बताए गए पते पर जाकर लोगों की मदद कर रही है। उन्होंने बताया कि इटावा मैनपुरी से पैदल हरपालपुर पहुंचे करीब 40 मजदूरों की स्क्रीनिंग कराके उन्हें समाजसेवी राजू शुक्ला द्वारा भोजन उपलब्ध कराया गया। बाद में इन मजदूरों को नौगांव, महोबा और टीकमगढ़ जिले के गावों तक पुलिस की मदद से वाहनों से पहुंचाया गया है। इस काम में सुनील रिछारिया, टिंकू राय, सदर पटवारी आशीष पांडे, दीपू सोनी, अनाड़ी मिस्त्री, मन्नू सिंह सहित समिति के अन्य लोगों का विशेष सहयोग है। अब इस काम के लिए लोग अपनी ओर से सहयोग देने के लिए आगे भी आ रहे हैं। इन सहयोगियों में रज्जू चौरसिया ने 15 लीटर तेल, गुप्त दान में 2100 रुपये, विवेकानंद प्रसार समिति द्वारा 25 किलो आटा व 15 लीटर सरसों का तेल, पप्पू मंसूरी ने 1000 रुपये, अशोक सिंह ने 30 किलो आटा व 8 लीटर रिफाइंड आयल, कृष्ण कु मार राय ने 10 किलो आटा, नारायण सिंह बुंदेला ने 600 रुपये, मुबारक अली ने 1000 रुपये, जितेंद्र सिंह तोमर ने दिल्ली से 1000 रुपये भेजे हैं। लोगों ने बताया कि पीड़ित मानवता की सेवा के लएि यहां गंगा-जमुनी तहजीब का उदाहरण सामने आया है। सभी का सिर्फ एक ही लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों की सहायता कर सकें ।

नोट- फोटो 25 का कै प्सन है-

हरपालपुर। जरूरतमंदों को भोजन के पैकेट बांटते समाजसेवी।-25

खाद्य सामग्री मिलने से खिले गरीबों के चेहरे

छतरपुर शहर में नसीम खान, जावेद मामू, कल्लू रावत, कल्लू कलई, रानू दादा, हरविंदर सरदार, मोनू, शीलवंत पचौरी, अजमेरी बाबा मजदूरों, गरीबों एवं मरीजों के परिजनों के लिए भोजन की व्यवस्था करने में जुटे हैं। स्वयं के व्यय पर लगातार भोजन सामग्री एवं लंच पैकेट बांटकर लोगों की मदद कर रहे हैं। सहम्बी मंडपम विवाह घर में भोजन बनाने की व्यवस्था की गई है। सोमवार को बच्चा जेल, मिशन अस्पताल, विश्वनाथ कालोनी, जिला अस्पताल, बस स्टैण्ड एवं बाहर से आए हुए राहगीरों को लंच पैकेट बांटे गए। खाद्य सामग्री मिलने से पीड़ित परिवारों के चेहरे खिल गए। इस मुहिम को नगर में सराहा जा रहा है।

घर-घर पहुंचाया खाद्य सामग्री का पैकेट

कोरोना के खतरे के मददेनजर जारी लॉकडाउन के दौरान रोज कमाने-खाने वालों का बुरा हाल हो गया है। उनके सामने अपने परिवार के भरण-पोषण को लेकर एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। खजुराहो नगर के समाजसेवी पं. प्रभुदयाल गौतम इस समय प्रभावितों को उनके घर-घर जाकर खाद्य सामग्री का पैक पहुंचाने में जुटे हैं। इस पैक में 10 किलो आटा, 3 किलो चावल, 2 किलो दाल, 1 किलो नमक तथा तेल-मसालों को रखा गया है। इस अभियान से लोगों को काफी राहत मिल रही है। श्री गौतम का कहना है कि लॉकडाउन के कारण लोगों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, पर उन्हें वे अपनी ओर से सामग्री देकर मदद करने का क्रम जारी रखेंगे।

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खजुराहो। पीड़ितों का खाद्य सामग्री का पैक बांटते गौतम।-26

सोमवार की खास जानकारी-

सूर्योदय-सुबह 6.05

सूर्यास्त-शाम 6.27

तापमान-अधिकतम-31.4.0 डिसे

न्यूनतम-16.0 डिसे

रसोई गैस सिलेंडर-832 रुपये

व्यवसायिक गैस सिलेंडर-1419 रुपये

डीजल-69.25 रुपये

पेट्रोल-78.21 रुपये

फे सबुक वाल से-

शहर में लॉकडाउन के कारण सबसे ज्यादा परेशानी निर्धन वर्ग के उन लोगों को हो रही है, जो रोज कमाकर परिवार के लिए रोटी जुटाते थे। इस समस्या से निपटने के लिए कुछ समाजसेवी जिस तरह से कोरोना के संक्रमण के खतरे की परवाह न करके उन्हें भोजन व राशन की व्यवस्था करने में लगे हैं, यह पहल सराहनीय है। रिसभ रांय, छात्र, छतरपुर

नोट- फोटो 27 का कै प्सन है-

छतरपुर। रिसभ रांय।-31

Posted By: Nai Dunia News Network

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