छतरपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिले में जलस्रोतों को तेजी से नुकसान पहुंचाने का सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। जिले की प्रमुख केन, धसान व उर्मिल नदियों सहित सभी नदियों से बड़े पैमाने पर रेत के अवैध उत्खनन ने नदियों में जलधारा को ही मोड़ दिया है। इस दिशा में प्रशासन कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर सका है।

जिले में केन, धसान व उर्मिल नदियों सहित लगभग सभी छोटी-बड़ी नदियों और रेत उपलब्धता वाले नालों में बड़े पैमाने पर रेत के अवैध उत्खनन ने नदियों के ईकोसिस्टम को ध्वस्त कर दिया है। खनन माफियाओं ने नदियों पर जगह-जगह बंधान और सड़क बनाकर नदी की मुख्य धारा से खुलकर छेड़खानी की है। बात यदि केन नदी की करें तो नदी एमपी व यूपी दोनों किनारों पर खनन माफिया, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का त्रिकोणीय गठजोड़ नदियों को खोखला करने में जुटा है। इन्हें इस बात की जरा भी चिंता नहीं है कि इस मनमानी व लापरवाही के कारण आने वाले दिनों में गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकते हैं। उल्लेखनीय है कि माइनिंग प्रोजेक्ट के लिए मिलने वाली पर्यावरण स्वीकृति व जल, जलवायु प्रमाणपत्र में लिखी शर्तो की बराबर अनदेखी की जा रही है। इसकी निगरानी की फुर्सत भी किसी को नहीं है। यहां बता दें कि जिले में शासन के कायदे-कानून व शर्तो का उल्लंघन करने वालों पर ठोस कार्यवाही न करके सिर्फ पर्यावरण, सीटोओ अनुमति देकर खानापूर्ति की जा रही है। लोगों का कहना है नदी पुनर्जीवन अभियान से नदियों का पुनर्जीवन भले ही न हो पाए, पानी चौपाल लगाकर प्रशासन नदियों की बढ़ती दुर्दशा पर स्थानीय असंतोष जानने व लोगों को जल संरक्षण की उपयोगिता में उलझाकर स्थानीय स्तर पर ही नियंत्रित करने में जुटा है। लोगों का ये भी कहना है कि यदि नदियों को रेत माफियाओं द्वारा पहुंचाए जा रहे नुकसान को रोकने पर ही फोकस किया जाए तो सही मायने में जल संरक्षण के प्रयास कारगर हो सकते हैं।

जलीय जीवों व वनस्पति के लिए खतरा

जियोलाजिस्ट प्रो. पीके जैन की मानें तो बालू, सिल्ट व ग्रावेल (बटईयां) नदियों के ईकोसिस्टम के जरूरी तत्व हैं। रेत नदियों के लिए फेफड़े की तरह कार्य करती है। यही रेत बाढ़ के पानी को सोखती है और पानी के प्रवाह को नियंत्रित करके भू-जलसतर को रिचार्ज करने व बढ़ाने का काम करती है। अनेक जलीय जीव जो पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक होते हैं रेत उन्हें सहेजती भी हैं। बेतहाशा अवैज्ञानिक खनन से न केवल इन जलीय जंतुओं-पक्षियों के विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है, वहीं वनों का तेजी से कटाव हो रहा है जिससे नदियों के किनारे वृक्षविहीन होते जा रहे हैं। साथ ही साथ नदियों की धारा का कटाव भी होने लगा है।

मोतीलाल का पुरवा में नई अवैध रेत खदान शुरू

छतरपुर जिले की प्रमुख केन नदी में पन्नाा जिले के एक रेत माफिया ने नेहरा पंचायत के मोतीलाल का पुरवा में एक नई अवैध रेत खदान से खनन शुरु कर दिया है। नदी में 3 बड़ी मशीनें उतारकर अवैध रुप से खनन तो किया ही जा रही है वहीं इस रेत खदान से निकलने वाली रेत में मिले पत्थर छानने के लिए बीच नदी में प्लांट भी लगाया गया है। नदी में कटाव के कारण पुरवा में नदी के किनारे के किसानों की जमीन भी नदी में समा गई है। गर्मी में नदी में पानी कम होने से पानी की धारा को ही मोड़कर पन्नाा जिले के किनारे की तरफ कर दिया है। जिससे छतरपुर जिले के हिस्से वाली रेत बाहर दिखाने से इसे मशीनों से निकाला जा रहा है। मोतीलाल का पुरवा निवासी किसानों में महेश द्विेवेदी, बलदेव केवट, शिवराम केवट, भूरा केवट, दयाराम केवट, भोले द्विवेदी ने बताया कि रेत माफिया मशीनों से छतरपुर जिले में स्थित उनके खेतों को रेत के लिए खोदा जा रहा है। इसका विरोध करने पर उन्हें धमकाया जाता है। प्रशासन को सूचना भी दी पर कोई मदद नहीं मिली। इस अवैध खदान से निकाली गई रेत पहले डंप की जाती है, फिर यूपी के पुरी गांव के रास्ते नरैनी-अजयगढ़-पन्नाा मार्ग से बांदा और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में सप्लाई की जाती है। यहां देखने में आ रहा है कि केन नदी की धार रोकककर नदी के बीच से रेत निकालने के लिए पहले खदान के रास्ते को दुरुस्त किया, फिर खदान पानी को रोककर रात में कई मशीनें लगाकर उत्खनन किया जा रहा है। सुबह होते ही मशीनों को खदान से गांव के खेतों में खड़ा कर देते हैं। बताते है कि कुछ दिनों से मशीनें धडल्ले से रात दिन काम कर रही हैं।

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इनका कहना है-

इन दिनों चुनाव कार्य में व्यस्त होने के कारण रेत का अवैध रूप से उत्खनन करने वालों पर छापामार कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। चुनाव बाद प्रमुखता से अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अमित मिश्रा, जिला खनिज अधिकारी, छतरपुर

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