खजुराहो। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए निर्णय के बाद त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन का रास्ता साफ होते ही अब ग्राम पंचायतों में जमा राशि को बिना निर्माण कार्य कराए आहरण कर ठिकाने लगाने की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं।

ऐसा ही एक मामला जनपद पंचायत राजनगर की ग्राम पंचायत ललपुर में सामने आया है। जिसमें सचिव के प्रभार में रोजगार सहायक द्वारा अनधिकृत सरपंच व जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से बिना निर्माण किए ही पंचायत की लगभग 24 लाख रुपये की राशि निकालने की तैयारी कर ली गई है। जिसकी भनक लगने पर सरपंच ने इसे रुकवाने के लिए अधिकारियों से गुहार लगाई है। इतना ही नहीं रोजगार सहायक पर आरोप है कि उसने लगभग छह लाख रुपये की राशि आहरण कर ली है, बाकी राशि निकालने की तैयारी कर रहा है। गौरतलब है कि ग्राम पंचायत ललपुर की सरपंच रतिया बाई निर्वाचित सरपंच हैं जिन्हें प्रशासन ने पद से हटा दिया था। इसके बाद जशोदा आदिवासी को सरपंच नियुक्त कर दिया, जिसके विरोध में रतिया बाई ने सागर कमिश्नर के यहां अपील की थी। जिस पर उन्हें पुनः सरपंच प्रभार सौंपने का आदेश मिला था, लेकिन लगभग 10 दिन बीतने के बावजूद उन्हें प्रभार नहीं मिल सका। जबकि वर्तमान में अनाधिकृत सरपंच के माध्यम से शासकीय राशि ठिकाने लगाने की कोशिश चल रही है। जपं सीईओ प्रतिपाल सिंह बागरी का कहना है कि स्थगन आदेश पर कार्यालय जिला पंचायत सीईओ द्वारा कार्रवाई का कोई आदेश नहीं मिला है। रही बात बिना निर्माण कार्य के राशि निकालने की तो जांच कराके राशि वसूल की जाएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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