छतरपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। किशोरावस्था में बच्चों के प्रति अभिभावकों की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है, यह वह अवस्था होती है जब बच्चों में शारीरिक, मानसिक परिवर्तन आते हैं और इस आयु में ही बच्चे की दिशा और दशा भी तय होती है। यह बात कल्पवृक्ष आइएएस अकादमी में आयोजित मोटिवेशनल क्लास में सेवानिवृत्त प्रो. सीएम शुक्ला ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कही है।

श्री शुक्ला ने कहा कि सभी बच्चे किसी न किसी प्रतिभा के धनी होते हैं। हमें इस उम्र में बच्चों की भावनाओं का बराबर सम्मान करते हुए बच्चों से मित्रवत व्यवहार करना चाहिए। बच्चे के मन में अपने प्रति इतना भरोसा कायम रहे कि वह हर परिस्थिति की बात हम सब से साझा करें। उन्होंने मार्गदर्शन देते हुए कहा कि आपके बच्चे भी दूसरे बच्चों की तरह ही अच्छे होते हैं पर हम उनकी दूसरे बच्चों से तुलना कर खुद ही उनके प्रति अन्याय कर बच्चों में हीन भावना भरने के साथ ही उनसे दूरी बनाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कभी बच्चा गलती भी करता है तो उसे सार्वजनिक रूप से लज्जित करने डांटने डपटने से बचना चाहिए। ऐसे में उसे अकेले में प्यार से समझाइश की जरूरत होती है। माता-पिता के बीच के वातावरण का भी इस उम्र में बच्चों का बहुत ही सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से समझाइश देते हुए कहा कि बच्चों पर सिर्फ और सिर्फ निरंतर अध्ययन का ही बोझ डालकर आप बच्चों में छिपी हुई अन्य प्रतिभायों का भी गला घोंट देते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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