छतरपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। धूप की तपन, तेज गर्मी से जहां इंसान पानी के लिए परेशान हैं वहीं जंगलों में भी नदी, तालाब, पोखर सूख जाने से वन्य प्राणी भी पानी न मिलने से जंगल से सटी बस्तियों का रूख करने लगे हैं।

छतरपुर जिले के अंतर्गत अलीपुरा, बिजावर, बाजना, बकस्वाहा, बडामलहरा, किशनगढ़ और खजुराहो सहित पन्नाा नेशनल पार्क से सटे चंद्रनगर के जंगलों में बाघ, नीलगाय, हिरन, चीतल, बारहसिंहा, भालू, तेंदुआ, जंगली सुअर, जंगली कुत्ते, सियार और बंदर बहुतायत में पाए जाते हैं। तेज धूप के कारण जंगल में पोखर सहित पानी के सभी स्त्रोत सूख चुके हैं। क्षेत्र से गुजर रहीं नदियों, तालाबों और जंगल में बने वाटर होल में पानी न होने से ऐसे में जंगलों में स्वच्छंद विचरण करने वाले जंगली जानवर एक-एक बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। जो अक्सर पानी की तलाश में जंगल के बीच और आसपास बसे गांवों का रुख कर रहे हैं। जंगल से जानवरों के बाहर निकलने पर शिकारियों की निगाहें भी उन पर टिक गई हैं। वहीं बस्तियों में जानवर दिखाई देने से ग्रामीण भी दहशत में रहते हैं। पन्नाा नेशनल पार्क के जलस्त्रोत सूख जाने से छतरपुर सहित आसपास के इलाकों में तेंदुए को घूमते देखा गया, जिसकी दहशत कई दिनों तक बनी रही। वन रेंज के अंतर्गत बाजना, किशनगढ़ और चंद्रनगर के आसपास तो जंगली सुअर, हिरण, भालू को अक्सर देखा जाता है। पिछले दो माह में करीब आधा दर्जन से अधिक मामले जिला अस्पताल में आए, जिसमें अपने खेतों में काम करते हुए ग्रामीणों को जंगली जानवरों ने हमला करके घायल कर दिया था। दरअसल ये वन्य प्राणाी पानी की तलाश में बस्तियों की ओर आकर भटक जाते हैं। ऐसे में कई बार शिकारियों का निशाना बनते हैं या फिर मजबूरी में अपना क्षेत्र बदलते रहते हैं।

वन विभाग ने कागजों पर की पानी की व्यवस्था

जिले के अंतर्गत आने वाली छह वन रेंज में हर साल पानी के लिए लाखों रुपयों का बजट खर्च किया जाता है। वन्य जीवों के लिए हौदियां बनाकर उनमें पानी भरने का काम प्राथमिकता से करना होता है, लेकिन हालात यह हैं कि मौके पर काम ही नजर नहीं आ रहा। इस बार सारा काम केवल कागजों पर ही पूरा कर लिया गया है। इस बार तो जंगल में हौदियां नहीं बनाई गईं, जबकि कागजों पर जंगलों में जगह-जगह हौदियां बनाकर उनमें टेंकर से पानी लाकर भरने के आंकड़े दर्ज करने में जरा भी चूक नहीं की गई है। देखा जाए तो पिछले सालों में जो हौदियां बनाई गई थीं उनमें ही पानी नहीं भरा गया। अधिकांश हौदियां टूट-फूट चुकी हैं या जो हैं वे सूखी पड़ी हैं। जिससे वन्य प्राणी प्यासे भटक रहे हैं। सूत्रों की मानें तो वन विभाग द्वारा वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए जंगलों में विभिन्ना उपाय करने के लिए लाखों रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई। इसके लिए सभी रेंजों से प्रस्ताव मांगे गए थे। इनके आधार पर पूरी योजना तैयार करके शासन को भेजी गई, इसके मंजूर होने के बाद रेंज को राशि स्वीकृत की गई, लेकिन अभी तक धरातल में कोई कार्य नहीं किए गए। इसके पीछे वन कर्मचारी विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों के बीच तालमेल न होने की बात करके अधिकारियों का ही दोषी बता रहे हैं।

इनका कहना है

हमारे यहां से सभी रेंजों में जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था कराए जाने के निर्देश दिए गए थे। जहां पर हरसंभव व्यवस्थाएं की गई हैं। किसी कारणवश जंगली जानवर रहवासी इलाकों में आते हैं तो टीमों द्वारा पकड़कर छोड़ दिया जाता है। पानी के लिए प्रबंध किए गए हैं।

अनुराग कुमार, डीएफओ, छतरपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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