अब्बास अहमद. छतरपुर

खजुराहो का जगदंबा मंदिर के पट साल में सिर्फ दो बार चैत्र और शारदीय नवरात्र में खुलते हैं। मूलतः यह विष्णु मंदिर था। वर्ष 1880 में यहां मनियागढ़ से पार्वती माता की मूर्ति स्थापित की गई। मंदिर के गर्भ गृह में माता पार्वती की काले पत्थर की प्रतिमा विराजमान है। गर्भगृह के प्रवेश द्वार पर सुंदर नक्काशी है। चंदेल शासकों ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इन्हें चंदेल राजाओं की कुलदेवी कहा जाता है। राजा प्रतापेश्वर और उनके वंशज मां की आज्ञा से ही शासन करते थे। पश्चिमी समूह मंदिरों में इस मंदिर की उपस्थिति दर्शाती है कि भगवान शिव के साथ शक्ति का कितना महत्व है। जनश्रुति है नवरात्र में यहां एक बार मां के दर्शन करने से संतान सुख से वंचित लोगों को संतान की प्राप्ति होती है। देशभर से लोग अपनी मनोकामना पूरी करवाने यहां आते हैं।

ऐसे करें मां की पूजाः घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ स्वास्तिक बनाएं। दरवाजे पर आम, अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं। ऐसा करने से मां दुर्गा प्रसन्ना होती हैं। घर में सुख-समृद्धि बढ़ेगी। माता की मूर्ति, तस्वीर स्वास्तिक चिन्ह बनाकर स्थापित करें। मां के समक्ष मिट्टी के बर्तन में जौ बोएं। कलश स्थापना के साथ रोली, अक्षत, मोली, फूलों से मंत्रों का उच्चारण कर पूजा करें, भोग चढ़ाएं। दीपक प्रज्वलित कर मां की आरती करें। मां को शक्ति का प्रतीक लाल रंग प्रिय है। पूजा करते समय लाल, गुलाबी, केसरिया, हरा, पीला, क्रीम रंग के वस्त्र धारण करें।

पूर्व में यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित था। मंदिर में स्थापित मूर्ति खंडित होने से उसके स्थान पर देवी जगदंबा की मूर्ति स्थापित की गई, जो काले पत्थर से निर्मित है। यह देवी मंदिर निराधार शैली पर आधारित है। इससे यहां परिक्रमा वर्जित है। नवरात्र में इस मंदिर में साक्षात मां विराजमान रहती हैं।

नरेंद्र कुमार शर्मा, स्थानीय रहवासी, खजुराहो

खजुराहो में 9वीं सदी का देवी जगदंबा मंदिर इकलौता मंदिर है, जिसके पट वर्ष में सिर्फ दो बार नवरात्र के समय ही पूजा-अर्चना के लिए खुलते हैं। चंदेल शासकों की कुलदेवी होने से इस मंदिर में पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। खजुराहो के साथ देशभर से लोग यहां नवरात्र में पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं।

राजीव कुमार शुक्ला, स्थानीय रहवासी, खजुराहो

Posted By: Nai Dunia News Network

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