छतरपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। शासन द्वारा महिलाओं को सम्मान दिलाने के लिए शुरू किए गए अभियान के तहत शहर के ओरछा रोड थाना परिसर में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत निगम ने महिलाओं को सम्मान दिलाने के लिए न्याय पालिका का हर संभव सहयोग दिलाने का वादा किया।

एडीजे श्री निगम ने महिला संबंधी कानूनों के सख्ती से क्रियान्वयन पर जोर देते हुए बाल विवाह को गलत बताया। गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जांच कराने व गर्भपात को कानूनी तौर पर अपराध बताते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं बेटे की चाह में यह अपराध करती हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामलों में चाहे वो सास या ननद के तौर पर महिला ही महिला की दुश्मन बन जाती है। न्यायाधीश श्री निगम ने छेड़-छाड़ और बलात्कार के मामलों की चर्चा करते हुए कहा कि इनमें ज्यादातर अपराध रिश्तेदार, घरवाले और जान-पहचान के लोग ही करते हैं, इसलिए लड़कियों को ऐसे लोगों से सजग रहने की जरूरत है। माता-पिता भी बच्चों से संवाद करते रहें। ज्यादातर मामलों में बदनामी के डर से लोग पुलिस थाने में जाने से डरते हैं। इसके लिए किसी भी न्यायालय में विधिक सेवा प्राधिकरण में शिकायत की जा सकती है। उन्होंने कार्य स्थल पर यौन हिंसा रोकने के लिए बनाए गए कानून की विस्तृत जानकारी देकर उसका लाभ लेने की सलाह दी। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने महिला सम्मान की शपथ भी ली। इस दौरान नुक्कड़ नाटक और जूडो-कराटे के प्रदर्शन द्वारा महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में छतरपुर के राजनारायण गुप्ता को गैंगरेप पीड़ित बच्ची को बचाने, परिवार परामर्श केन्द्र की काउंसलर उपासना सिन्हा और अनुपमा राणा को असली हीरो सम्मान के रूप में शील्ड भेंट करके सम्मानित किया गया

महिलाएं निडर होकर शिकायत करें, पुलिस उनके साथ हैः

पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने कहा कि जिन महिलाओं और लड़कियों के साथ अपराध होते हैं, उसकी पीड़ा वही समझती हैं। यदि कोई गलत करता है तो लड़कियों को गलत करने वालों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। जब तक आवाज नहीं उठाई जाएगी, महिला सशक्तिकरण धरातल पर नहीं उतर सकता है। एसपी ने कहा कि पुलिस ने महिला अपराध के मामले में सीबीआई से कहीं ज्यादा मामलों में सजा दिलाई है। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्य योजना है कि किसी भी रास्ते में बेटियों को निकलने में डर न लगे अगर पुलिस लड़कियों में भय खत्म न कर सके तो फिर असफल है। उन्होंने बताया कि महिला संबंधी अपराध करने वालों के ड्राईविंग लायसेंस रद्द किये जाएंगे तथा उनके घरों को भी तोड़ा जाएगा। महिलाएं निडर होकर शिकायत करें, पुलिस हमेशा उनके साथ है।

बेटियां मजबूत हो सशक्त बनें:

सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता ईशानी शर्मा ने कहा कि विडंबना है कि समाज को नारी के सम्मान के लिए अभियान चलाना पड़ रहा है। नारी सुरक्षा में सबकी भागीदारी बराबर की है। उन्होंने कहा कि बेटियां मजबूत हो सशक्त बनें, बेटियां आत्मनिर्भर बनें, इसलिए किसी को उनका मनोबल तोडे की कानून इजाजत नहीं देता है। कार्यक्रम को पुलिस परिवार परामर्श केन्द्र की काउंसलर अनुपमा राणा, महिला प्रकोष्ठ की प्रभारी डीएसपी अनुरक्ति साबनानी ने भी संबोधित किया। अंत में ओरछा रोड थाना प्रभारी माधवी अग्निहोत्री ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डीपीओ प्रवेश अहिरवार, एडीपीओ केके गौतम सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, बेटियां तथा पुलिसकर्मी मौजूद थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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