Navratra 2022: अब्बास अहमद, छतरपुर । छतरपुर जिले के खजुराहो में विश्व प्रसिद्व पश्चिमी समूह मंदिर श्रृंखला में 9वीं सदी का मां जगदंबा मंदिर अपने आप में अनूठा है। मंदिर में विराजमान मां जगदंबा के दर्शन वर्ष में दो बार नवरात्र पर होते हैं। नवरात्र के पहले दिन मंगलवार को सुबह मंदिर के पट खोल दिए गए हैं। अब यहां नौ दिनों तक देशभर से आए श्रद्वालु गर्भगृह में जाकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करेंगे।

जगदंबा मंदिर के पट चैत्र और शारदीय नवरात्र में खुलते हैं। मूलत: यह विष्णु मंदिर था। वर्ष 1880 में यहां मनियागढ़ से पार्वती माता की मूर्ति स्थापित की गई। मंदिर के गर्भ गृह में माता पार्वती की काले पत्थर की प्रतिमा विराजमान है। गर्भगृह के प्रवेश द्वार पर सुंदर नक्‍काशी है।

चंदेल शासकों ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इन्हें चंदेल राजाओं की कुलदेवी कहा जाता है। राजा प्रतापेश्वर और उनके वंशज मां की आज्ञा से ही शासन करते थे। पश्चिमी समूह मंदिरों में इस मंदिर की उपस्थिति दर्शाती है कि भगवान शिव के साथ शक्ति का कितना महत्व है।

जनश्रुति है कि नवरात्र में यहां एक बार मां के दर्शन करने से संतान सुख से वंचित लोगों को संतान की प्राप्ति होती है। देशभर से लोग अपनी मनोकामना पूरी करने यहां आते हैं।

खजुराहो के रहने वाले नरेंद्र कुमार शर्मा बताते हैं कि पूर्व में यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित था। मंदिर में स्थापित मूर्ति खंडित होने से उसके स्थान पर देवी जगदंबा की मूर्ति स्थापित की गई, जो काले पत्थर से निर्मित है। यह देवी मंदिर निराधार शैली पर आधारित है।

इससे यहां परिक्रमा वर्जित है। नवरात्र में इस मंदिर में साक्षात मां विराजमान रहती है। वहीं राजीव कुमार शुक्ला बताते हैं कि खजुराहो में 9वीं सदी का देवी जगदंबा मंदिर इकलौता मंदिर है, जिसके पट वर्ष में सिर्फ दो बार नवरात्र के समय ही पूजा-अर्चना के लिए खुलते हैं। चंदेल शासकों की कुलदेवी होने से इस मंदिर में पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। खजुराहो के साथ देशभर से लोग यहां नवरात्र में पूजा- अर्चना करने के लिए आते हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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