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बैतूल। कथावाचक।

बैतूल। नवदुनिया न्यूज

प्रेमगढ़ कोसमी राधाकृष्ण मंदिर स्थल टेकड़ी पर राधाष्टमी पर्व धूमधाम से मनाया गया। राधा जन्माष्टमी पर्व पर कथा वाचक द्वारा आयोजन में उपस्थित भक्तों के समुख अपने उद्गागार रखे गए। उन्होंने इस अवसर कहा कि प्रेम मार्ग ही सरल व सुगम मार्ग है। जिस पर चलकर भक्त परम आत्म अवस्था को अनुभुत कर सकता है। उनके द्वारा राधा कृष्ण के अनेक प्रेम संस्मरणों को याद किया गया। कथा वाचक ने यह भी बताया कि कलयुग में कष्टों के बीच रहते हुए कैसे हम प्रेम बनाए रख सकते हैं। साक्षीभाव ही ऐसी विधि है, जिससे मानव सभी सांसारिक झंझावातों में रहते हुए अपने को अलग रखते हुए प्रेमभाव से रह सकता है। कथा वाचक ने यह भी कहा कि निरोगी कायावान मानव प्रेममय जीवन जीता है। कलयुग में हम सदा रोगों से घिरे हुए हैं जिसका कारण हम अतिशय मनोरंजन कर अपने आप को भुलाने में लगे हुए है। ज्यादातर रोगो का कारण कथा वाचक ने घर-घर में रखे टीवी को लगातार टकटकी लगाकार देखने को माना है। कथा वाचक कहते हैं हमारी खुली आंखों से शरीर की 80 प्रतिशत उर्जा बहार बह जाती है, जिससे शरीर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता खो देता हैं जिसके परिणामस्वरूप शरीर में रोग जगह बनाने लगते है। शास्त्रों में कहा भी गया है अति सर्वत्र वर्जयेत। मनोरंजन भी उतना ही हो जितना लगे की जरूरी हो। मानव यदि स्वयं को याद करते हुए परमात्मा प्रेम में लीन हो तो उसका बोध खुद ब खुद विकसित होगा और बोध से मुक्ति मार्ग प्रशस्थ होगा। प्रेम ही मुक्ति है प्रेम ही परमात्म अनुभुति है निर्विचार होना ही परम आत्म अवस्था है। स्थानीय कलाकारों द्वारा राधाकृष्ण जी की सुंदर झांकी की साज-सज्जा की गई, जिसका हजारों श्रद्घालुओं ने दर्शन किया। मंदिर प्रांगण में माताओं-बहनों ने भजन गायन भक्ति भाव से किया। कार्यक्रम में आसपास ग्रामीण क्षेत्र से हजारों की संख्या में श्रद्घालु उपस्थित हुए। आयोजन दोपहर 12 बजे प्रारंभ हुआ समापन शाम 4 बजे प्रसादी वितरण कर किया गया। आयोजन को सफल बनाने में बंशीदास महाराज, राधादास महाराज, नंदकिशोर मालवीय, नाथुराम लोखंडे, प्रमोद शिंदे, अनिल वर्मा, विनोद वर्मा, गुड्डा वर्मा, जयपाल सरनेकर, का विशेष सराहनीय सहयोग रहा।

Posted By: Nai Dunia News Network