सबसे पहले आनंद विभाग बनाने वाला मप्र हैप्पीनेस इंडेक्स के मामले में 28 वें नंबर पर-00

- आइआइटी और आइआइएम में प्रोफेसर रहे राजेश पिलानिया ने बनाया देश का हैप्पीनेस इंडेक्स

- मिजोरम, पंजाब सबसे खुशनुमा राज्य

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

देश में सबसे पहले आनंद विभाग बनाने वाला मध्यप्रदेश खुशहाली के मामले में सबसे फिसड्डी राज्यों में से है। पिछले दिनों आइआइटी और आइआइएम के पूर्व प्रोफेसर राजेश पिलानिया के नेतृत्व में हुई स्टडी के आधार पर जारी रिपोर्ट में मप्र को हैप्पीनेस इंडेक्स में 28 वीं रैंकिंग मिली है। वहीं मिजोरम और पंजाब जैसे छोटे राज्य इस मामले में अव्वल हैं। कोरोना का भी मप्र के लोगों पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। कोरोना से खुशियों पर पड़ने के मामले में मप्र 8 वें नंबर पर है, जबकि मणिपुर, अंडमान और निकोबार के लोग इस दौर में भी आशावादी बने रहे।

कुंवारों की अपेक्षा शादीशुदा ज्यादा खुश

देशभर में यह स्टडी 16950 लोगों पर मार्च से जुलाई 2020 तक की गई थी। स्टडी बताती है कि कुंवारे लोगों की अपेक्षा शादीशुदा लोग ज्यादा खुश हैं। स्टडी में हावर्ड बिजनेस स्कूूल की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. एश्ले विलियन्स कहती हैं कि जो लोग पैसा कमाने से ज्यादा सामाजिक कार्यों, व्यायाम में समय बिताना पसंद करते हैं, वे ज्यादा खुश रहते हैं। हिंदू धर्म के मिथक पर लिखने वाले देवदत्त पटनायक का मानना है कि घर में खुशियों के लिए लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा का वास जरूरी है।

पांच साल बाद भी खुशियों के प्रति आशावादी नहीं मप्र वासी

मौजूूदा स्थिति के मुकाबले पांच साल बाद खुशियों के प्रति आशावादी रहने के मामले में भी मप्र पिछड़े राज्यों में शामिल हैं। अध्ययन में सामने आया कि मणिपुर, अंडमान और निकोबार के लोग पांच साल बाद की स्थिति को लेकर सबसे ज्यादा आशावादी हैें। वहीं मप्र का स्थान 29 वां है।

इन मानकों पर हुआ अध्ययन

- कार्य क्षेत्र, उससे जुड़े मसले और तरक्की

- परिवारवालों और दोस्तों से संबंध

- शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य

- सामाजिक सरोकार

- धर्म और अध्यात्म में रुचि

मप्र को मिले 5 में से इतने नंबर

- कार्य क्षेत्र : 2.95

- पारिवारिक संबंध : 3.91

- स्वास्थ्य : 3.63

- सामाजिक सरोकार : 3.33

- धर्म : 3.49

हैप्पीनेस इंडेक्स में टॉप 10 राज्य

- 1. मिजोरम

- 2. पंजाब

- 3. अंडमान और निकोबार

- 4. पुड्डुचेरी

- 5. सिक्किम

- 6. गुजरात

- 7. अरुणाचल प्रदेश

- 8. लक्षद्वीप

- 9. तेलंगाना

- 10. उत्तर प्रदेश

दस सबसे पिछड़े राज्य

36. छत्तीसगढ़

35. उत्तराखंड

34. उड़ीसा

33. मेघालय

32. गोवा

31. राजस्थान

30. नागालैंड

29. तमिलनाडू

28. मध्यप्रदेश

27. जम्मू और कश्मीर

मप्र का आनंद विभाग एक नजर में

- 2016 में आनंद विभाग की स्थापना हुई।

- इसके तहत राज्य आनंद संस्थान की स्थापना हुई।

- 2018 में धर्मस्व और आनंद विभाग को मर्ज कर अध्यात्म विभाग बनाया।

- 48 करोड़ रुपये का बजट वित्तीय वर्ष 2020-21 में

एक्सपर्ट कमेंट :

सरकारी आनंद विभाग बना लेने से कोई प्रदेश खुशहाल नहीं हो सकता। एक व्यक्ति की पहली जरूरत रोटी, कपड़ा और मकान है। इसके बाद गुड गवर्नेंस भी अहम है। यदि किसी आम आदमी को अपना काम करवाने के लिए सरकारी विभागों के चक्कर काटने पड़ें तो आप उससे खुशी की उम्मीद नहीं कर सकते। मप्र में राज्य आनंद संस्थान भले ही बना दिया हो, लेकिन वह सिर्फ सरकारी प्रक्रिया पूरी कर रहा है बल्कि उससे तो सरकारी खर्च में बढ़ोतरी हुई है।

- केएस शर्मा, पूर्व मुख्य सचिव मप्र

Posted By: Nai Dunia News Network

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