छिंदवाड़ा से जितेंद्र राजपूत। छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर बोरिया गांव के शासकीय स्कूल के दृष्टिहीन शिक्षक कमलेश साहू ने बचपन में परेशानियां झेलीं पर लोगों की मदद से अपनी पढ़ाई पूरी की, सरकारी शिक्षक बने। ऐसी दिक्कतें किसी और की राह का कांटा न बनें इसलिए छिंदवाड़ा के एमएलबी हायर सेकंडरी स्कूल में पढ़ रहीं ग्रामीण क्षेत्र की 15 दिव्यांग व जरूरतमंद छात्राओं की मदद करने का बीड़ा उठा लिया। उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए साहू ने छिंदवाड़ा स्थित अपने घर को ही छात्रावास बना दिया और इसे नाम दिया 'भारत माता दिव्यांग विद्या आवास'। 11वीं, 12वीं की आठ मूक-बधिर और सात दृष्टिहीन छात्राएं यहां रहकर पढ़ाई कर रही हैं। इस नेक काम में साहू की मदद कर रही हैं सुक्लूढाना हायर सेकंडरी स्कूल की शिक्षिका किरण सोनी।

दोनों इन छात्राओं की फीस से लेकर भोजन सहित अन्य खर्च की व्यवस्था कर रहे हैं। दोनों इसके लिए सामाजिक संस्थाओं और समाजसेवियों से भी मदद मांगते हैं। साहू ने बताया कि इन छात्राओं पर हर माह करीब 35 हजार रुपए खर्च होता है। इसमें राशन, दूध, सब्जी पर लगभग 25 हजार रुपए, रसोइया पर 2500 रुपए, उन्हें छात्रावास में पढ़ाने वाले दो शिक्षकों पर चार-चार हजार रुपए और दवाइयों आदि पर दो हजार रुपए का खर्च आता है। समाजसेवियों और संस्थाओं से पैसा एकत्रित होने के बाद राशि कम पड़ती है तो दोनों मिलाते हैं। साहू बताते हैं कि कई परेशानियों के कारण अधिकांश दिव्यांग लड़कियां पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं।

ये छात्राएं पढ़ाई न छोड़ें, इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने यह प्रयास शुरू किया है। दरअसल, ये छात्राएं पहले सरकारी छात्रावास में रह रही थीं लेकिन वहां 10वीं के बाद रहने का प्रावधान नहीं है। साहू ने इन छात्राओं को 8 जुलाई 2018 से मार्च 2019 तक किराए के आवास में रखा, फिर 14 जुलाई 2019 से छात्रावास अपने घर में ही शुरू कर दिया। हर्रई ब्लॉक के मोहरिया गांव की दृष्टिबाधित देवकी काकोड़िया इसी छात्रावास में रहकर 12वीं की पढ़ाई कर रही हैं। वे कहती हैं कि यह व्यवस्था नहीं होती तो शायद उनकी पढ़ाई रुक जाती।

चार अनाथ कन्याओं की शादी करवा चुकी हैं शिक्षिका सोनी

किरण सोनी इन छात्राओं की मदद से पहले अब तक चार गरीब अनाथ लड़कियों की शादी लोगों के सहयोग से करवा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि फीस के अभाव में जिन बच्चियों की पढ़ाई बीच में छूट जाती है। ऐसी बच्चियों का फिर से स्कूल में एडमिशन करवाकर उनके लिए फीस, पुस्तक-कॉपियों की व्यवस्था भी समाजसेवियों के सहयोग से करती हैं।

Posted By: Prashant Pandey

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