सौंसर। महाराष्ट्र की सीमा से लगे सौंसर क्षेत्र में बसे हजारों उत्तर भारतीय, बिहारी परिवारों के महापर्व छठ पूजा धूमधाम से मनाई गई। अधिकांश परिवार यह त्योहार अपने, अपने घरों में मनाना पसंद कर रहे हैं, अब यह त्योहार उत्तर भारतीय व बिहार के लोगों का न होकर स्थानीय लोगों का भी बन चुका है। स्थानीय लोग भी इस त्योहार में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने लगे हैं। प्रातः काल से ही सूर्य भगवान को पानी में खड़े होकर अर्घ्य देने व उपासना पूजा करती महिलाएं नजर आईं। महिलाओं ने सूर्य उपासना पूजा अर्चना कर उपवास व्रत कर यह त्योहार मनाया। साथ ही अपने परंपरागत वस्त्र आभूषण व श्रृंगार से सज, धज कर नजर आईं। छठ पर्व या षष्ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिंदू पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। कहा जाता है कि यह पर्व बिहारीयों का सबसे बड़ा पर्व है ये उनकी संस्कृति है। छठ पर्व बिहार में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। ये एक मात्र ही बिहार या पूरे भारत का ऐसा पर्व है जो वैदिक काल से चला आ रहा है और यह अब हमारी संस्कृति बन चुका है। सौंसर ब्लॉक के औद्योगिक क्षेत्र नगर बोरगांव में बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ छठ महापर्व मनाया गया। इस मौके पर सैकड़ों की तादाद में महिलाओं ने पवित्र जलाशय मे पूजन-अनुष्ठान कर सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। इस मौके पर छठ महापर्व समिति बोरगांव द्वारा सूर्य देव की विशेष पूजा और आरती उतारी गई। बिहार और झारखंड की संस्कृति को समेटे इस पर्व को उत्तर भारतीय एवं बोरगांव वासियों ने भी बेहद हर्ष और उल्लास के साथ मनाया।शाम ढलते ही बडी की संख्या में पुण्य बोरगांव जल कुंड के तट पर पहुची महिलाओं ने छठ माता की पूजा की और भजन गाते हुए ढलते हुए सूर्य देव को पवित्र जल में खड़े होकर अर्घ्य दिया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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