छिंदवाड़ा। जिले की सबसे पुरानी सक्रिय नाट्य संस्था नाट्यगंगा ने अभूतपूर्व रंग अभियान थियेटर आपके घर की शुरुआत की। इस रंग अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को रंगकर्म से कलाकार या दर्शक के रूप में जोड़ना है। ऐसे लोग जो कि नाट्य मंचन देखने नहीं पहुंच पाते उनके आंगन तक नाटक पहुंच गया। इस अभियान के अंतर्गत संस्था के बाल कलाकारों ने स्थानीय सिग्नेचर कॉलोनी में मंगलवार रात को झगड़ा निपटारक दफ्तर का शानदार मंचन किया। इस मंचन को देखने के लिए बड़ी संख्या में कॉलोनीवासी उपस्थित रहे। इस कहानी की लेखिका सूर्यबाला और इसका सटीक नाट्य रूपांतरण सचिन वर्मा ने किया है। इस नाटक का निर्देषन संस्था के युवा कलाकार केतन सोनी और मानसी मटकर एवं सहनिर्देशन दानिष अली ने किया। नाटक के प्रत्येक दृश्यों को जिस मजबूती के साथ दिखाया गया उसे देखकर यह कहना मुश्किल था कि इन लोगों ने पहली बार निर्देशन किया है। विदित हो कि ये सभी नाट्यगंगा की कार्यशालाओं से प्रशिक्षित कलाकार हैं जिन्होंने पहली बार किसी नाटक का निर्देशन किया है। नाटक के लिए गीत सुवर्णा दीक्षित और शेफाली शर्मा ने लिखे और इन्हें अमजद खान, स्वाति चौरसिया, अर्पणा पाटकर और निकेतन मिश्रा ने स्वर दिए। इसके साथ ही मंचन की अन्य व्यवस्थाएं भी युवा कलाकार हर्ष यादव, फैसल कुरैषी, सुमित गुप्ता हेमंत नांदेकर, पराग दुबे, इषांक पराते आदि ने संभाली। साथ ही वरिष्ठ कलाकारों वैषाली मटकर, रोहित रूसिया, संजय औरंगाबादकर, नीता वर्मा, कुलदीप वैद्य, विनोद ग्यास आदि ने मंचन की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इन बाल कलाकारों ने किया अभिनयः नाटक में बाल कलाकारों प्रभदीप सिंग, कुमार आदित्य रूसिया, प्रियांषु पाठक, मित्र मालवीय, तेजस्वनी बंसोड़, अनुष्का चौरसिया, आयुषी जैन, वंषिका चौरसिया, कृष्णा क्षत्रिय, कुमार जन्मेजय रूसिया, परी नागले, अमोदनी जैन, पंखुड़ी मक्कड़, शांभवी गुप्ता, अनवय ठेंगे और वरेण्यम नागले ने शानदार अभिनय किया।

ये है नाटक की कहानीः नाटक की कहानी एक कॉलोनी के कुछ बच्चों की है, जो लॉकडाउन समाप्त होने के बाद कुछ नया करना चाहते हैं। तब वो लोग तय करते हैं कॉलोनी के बच्चों के छोटे मोटे झगड़ों को निपटाने के लिए एक झगड़ा निपटारक दफ्तर खोला जाए। दफ्तर खुल जाने के बाद बच्चों के सभी छोटे मोटे झगड़े वहां निपटाए जाने लगते हैं, जिससे धीरे, धीरे बच्चों के बीच झगड़े होना भी लगभग बंद हो जाता है। अंत में कहानी में नया मोड़ तब आता है जब दो बच्चों के पिता आपस में झगड़ते हैं और बच्चों को भी एक साथ खेलने से मना कर देते हैं तब बच्चे बहुत ही रोचक तरीके से उनका झगड़ा भी सुलझाकर उनकी दोस्ती करवा देते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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