Chindwara News: छिंदवाड़ा, (नवदुनिया प्रतिनिधि)। एक ओर शासन 'स्कूल चलें हम' अभियान को गति देने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन जो छात्र स्कूल जाकर पढ़ना चाहते हैं, उन्हें तब निराशा हाथ लगती है, जब स्कूलों में शिक्षक ही मौजूद नहीं होते हैं। जिले में सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के क्या हालात हैं, इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 196 सरकारी स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। इन स्कूलों में अतिथि शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई कराई जा रही है। सबसे ज्यादा आदिवासी विकास विभाग के स्कूलों के हालात खराब हैं। विद्यार्थी स्कूल पहुंच रहे हैं लेकिन शिक्षक ही नहीं हैं। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 69 प्राइमरी और 127 मिडिल स्कूल शून्य शिक्षकीय शाला हैं। यानी इन स्कूलों में एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं हैं और बाकायदा स्कूलों को लगाया जा रहा है। हर्रई विकासखंड के 63 जुन्नारदेव के 83 और तामिया के 45 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है।

इन स्कूलों की हालत बदतर

आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित शासकीय स्कूलों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। अमरवाड़ा, बिछुआ में 3, 3 और पांढुर्णा में सिर्फ एक शून्य शिक्षकीय शाला है। कई स्कूल अतिथि शिक्षकों के भरोसे में चल रहे हैं।इस कारण शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहे हैं, इस बारे में जब आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जिन स्कूलों में शिक्षक पदस्थ नहीं है, उन स्कूलों में शिक्षकों को प्रभार देने के अलावा अतिथि शिक्षकों के जरिए कार्य करवाया जा रहा है। बहरहाल इस पूरी अव्यवस्था के कारण छात्र, छात्राओं की पढ़ाई आवश्यक रूप से प्रभावित हो रही है, लेकिन वर्तमान में इस समस्या को लेकर छात्र, छात्राएं किसी तरह पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

स्वीकृत पदों से ज्यादा शिक्षक

जिले में सहायक शिक्षक वर्ग के शिक्षकों के 3 हजार 360 पद स्वीकृत हैं, जिसके एवज में 3 हजार 902 शिक्षक पदस्थ हैं। यानि 542 शिक्षक ज्यादा पदस्थ हैं। इसके बावजूद इन शिक्षकों को माध्यमिक शाला में पढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। जिले में उच्च श्रेणी या माध्यमिक शाला शिक्षक के कुल 2 हजार 967 पद स्वीकृत हैं, जबकि जिले में एक हजार 329 शिक्षक ही पदस्थ हैं। ऐसे में एक हजार 638 शिक्षकों के पद रिक्त होने पर प्राथमिक शाला के शिक्षकों को माध्यमिक शाला की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इनका कहना है

जिन स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, उन स्कूलों में शिक्षकों को प्रभार देने के अलावा अतिथि शिक्षकों के जरिए शिक्षण कार्य करवाया जा रहा है। शिक्षकों की काउंसिलिंग के लिए भोपाल पत्र लिखा गया है।

- उमेश सातनकर, सहायक संचालक आदिवासी विकास विभाग

शिक्षकीय संवर्ग की स्थिति

स्वीकृत - 9005

कार्यरत - 6436

रिक्त - 2569

शून्य शिक्षकीय शालाओं के हाल

कुल विकासखंड - 11

प्राइमरी स्कूल - 69

माध्यमिक शाला - 127

कुल - 196

एक शिक्षकीय शाला

कुल विकासखंड - 11

प्राथमिक - 269

माध्यमिक - 159

कुल - 428

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Posted By: Nai Dunia News Network

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