उमरहर गौशाला में किया जा रहा है प्रयोग, मशीन बुलाई, गौमूत्र से फिनाइल भी बनेगी

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प्रवीण काटकर,

छिंदवाड़ा। पर्यावरण सरंक्षण को बढ़ावा देने के लिए गौ शाला में रखे जाने वाले मवेशियों के गोबर से लकड़ी बनाई जाएगी। इस लकड़ी का उपयोग श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए किया जाएगा। यह अनूठी पहल शहर से करीब 22 किमी की दूरी पर बसे ग्राम उमरहर में बनी गौ शाला में किया जा रहा है। इतना ही नहीं 20 फरवरी से शुरू होने वाली इस गौ शाला में गौमूत्र से फिनाइल भी बनाई जाएगी। जिसका उपयोग भी रोजाना लोगों द्वारा किया जा सकेगा।

जिला मुख्यालय से करीब 22 किमी की दूरी पर बसे ग्राम उमरहर में हाल ही में करीब एक 1 एकड़ भूमि में गौ शाला का निर्माण किया गया है। यह गौ शाला जिले की पहली हाईटेक गौशाला होगी। जहां 100 मवेशियों को रखने के साथ-साथ उन गौ शाला में गौ सेवा भी की जाएगी। इसके अलावा गौ शाला में रखे गए मवेशियों से निकलने वाले गोबर का उपयोग लकड़ी बनाने के लिए किया जाएगा। जिसके लिए बकायदा विभाग द्वारा मशीन बुलाई गई है। इस मशीन के माध्यम से गोबर की लकड़ी बनाई जाएगी। इस गोबर की लकड़ी का उपयोग जिले के श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए किया जाएगा।

वर्मी वाश से फसल के नष्ट होंगे कीट

इसके साथ ही गौ शाला में ताजा वर्मी कंपोस्ट और केंचुए के शरीर को धोकर से वर्मी वॉश बनाया जा रहा है। इस वर्मी वॉश का उपयोग किसान अपने-अपने खेतों में लगी शाकाहारी फसल में कर सकेंगे। ताकि इस वर्मी वॉश के माध्यम से फसल में लगे कीटों का नाश होगा। जिससे किसानों को राहत मिलेंगी।

गौ मूत्र से बनेगी फिनाइल

इस मामले में उपसंचालक पशु चिकित्सा डॉ. एचजी एस पक्षवार ने बताया कि उमरहर में बनी गौ शाला में रहने वाले करीब 100 मवेशियों के गौ मूत्र का उपयोग गौ फिनाइल बनाने के लिए किया जाएगा। जो विभिन्ना बीमारियों के जीवाणु, विषाणु एवं फफूंद नाशक, यह पूरी तरह से रसायन मुक्त है। साथ ही मच्छर, मक्खी और अन्य कीटों को फर्श से दूर करता है। साथ ही इस फिनाइल का उपयोग फर्श को साफ करने के लिए भी किया जा सकता है।

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