मुलताई। भारत के बाद अब फ्रांस में भी स्वच्छता अभियान को लेकर फिल्म बड़े पर्दे पर प्रदर्शित होगी। फ्रांस की मोनालिसा प्रोडक्शन कंपनी मुलताई ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय की स्थिति सहित बैतूल जिले के भीमपुर ब्लॉक की अनिता नर्रे द्वारा ससुराल में शौचालय नहीं होने को लेकर किए गए संघर्ष को लेकर फिल्म बना रही हैं, जिसे लेकर रविवार को फ्रांस से आई स्टार कास्ट और पूरी टीम ने शूटिंग की।

मुलताई के बाद बैतूल जिले के कई गांवों में जाकर शूटिंग की जाएगी और भारत के स्वच्छता अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा। छोटे-छोटे गांव में शौचालय है। एक समय था जब गांवों में मैदान में जाकर शौच करना पड़ता था, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदली है। गांव-गांव, घर-घर में शौचालय है, वरना एक समय था, तब नई नवेली दुल्हनों को ससुराल में शौचालय नहीं होने से ससुराल छोड़कर मायके आना पड़ता था, यह एक बहुत ही सुखद अनुभव है, भारत में स्वच्छता अभियान तेजी से घर-घर तक पहुंचा है और हम इसी को लेकर एक फिल्म तैयार कर रहे हैं, उक्त बातें फ्रांस से आए मोनालिसा प्रोडक्शन कंपनी के डायरेक्टर थैरी बेरोड एवं कैमरामेन जीन पीयरे और दिल्ली की दिव्या दुगड़ ने मुलताई में कही। सभी मिलकर स्वच्छता अभियान को लेकर गेम आफ ट्रोन्स फिल्म बना रहे हैं, जिसे फ्रांस सहित दुनिया भर में दिखाया जाएगा।

फिल्म के डायरेक्टर थैरी बेरोड ने कहा कि वह भीमपुर की अनिता नर्रे की कहानी को भी इस फिल्म में शामिल कर रहे हैं, उन्होंने भारत में बनी 'टायलेट एक प्रेम कथा फिल्म' को देखा है, जिससे वह बहुत प्रभावित हुए हैं और इसी को लेकर स्वच्छता थीम को लेकर नई फिल्म बना रहे हैं, जो पूरे विश्व में लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करेंगी। दिल्ली से आई दिव्या दुगड़ ने कहा कि वह इस प्रोडक्शन को भारत में सपोर्ट कर रही हैं और स्वच्छता को लेकर क्या-क्या काम हुआ है और अभी क्या-क्या काम होना बाकी है, इसे लेकर स्टोरी बनाकर उसका फिल्मांकन करने का काम कर रही हैं।

यकीन नहीं होता गांव में भी है शौचालय

फ्रांस से आए थैरी बेरोड ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं होता कि भारत की एक तहसील मुलताई और मुलताई तहसील के छोटे-छोटे गांव में घरों में शौचालय है। उन्हें आंकड़ों पर यकीन नहीं था, इसलिए वह फ्रांस से खुद वास्तविकता देखने मुलताई आए थे और घरों में शौचालय देखकर उन्हें खुशी हो रही है कि वाकई में शौचालय बने हैं। शौचालयों के बनने से गांवों में बीमारियां नहीं फैलेंगी और महिलाओं को भी सुविधा होगी, इसलिए यह शौचालय बहुत ही महत्वपूर्ण है।

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