मोहखेड़(नवदुनिया न्यूज)। विकासखंड में लगभग आधा दर्जन गांव ऐसे हैं, जहां खनिज खदान हैं। खनन के लिए विभाग द्वारा अनुमति दी जाती है एवं संबंधित से राशि वसूल की जाती है जो प्रदेश के लिए विकास एवं अन्य जरूरतों को पूरा करने में प्रयुक्त किया जाता है। बताया जा रहा है कि संबंधित ठेकेदारों द्वारा जहां एक या दो खदान लीज में ली जाती है और आसपास की जगहों पर अवैध खदान शुरू कर दी जाती है। इस तरह की अव्यवस्था से शासन को प्रतिमाह लाखों रूपये का चूना लग रहा है। वहीं दूसरी तरह विभाग की इस लापरवाही के चलते चरनोई की भूमि धीरे-धीरे गायब होती जा रही है। जिससे न केवल वायु मंडल का संतुलन बिगड़ने का अंदेशा बढ़ता जा रहा है, जंगल ही नहीं बल्कि ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लोगों के मूख मवेशियों को चारे की समस्या होने लगी है। सूत्रों की मानें तो वर्षा काल समाप्त होने के बाद पूरी धरती घास रूपी मखमल में तब्दील हो चुकी है। बावजूद इसके विकासखंड के दर्जन से ज्यादा गांव ऐसे हैं, जहां जानवरों को चारे की समस्या से जूझना पड़ रहा है।

भूख से बेमौत मर रहे मवेशी

विकासखंड के विभिन्ना गांवो में चल रहे अवैध खनन की वजह से शासकीय चरनोई की भूमि लगातार गायब होती जा रही है। हालांकि शासन के नक्से में भूमि तो मौजूद है लेकिन वास्तविक हालत में इन जमीनों में गड्ढे हो चुके हैं। निर्माण कार्य में लगातार बढ़ती मांग की वजह से अवैध खनन जोरों पर है। लगातार हो रहे अवैध खनन के चलते मूक पशुओं के लिए चारा का संकट पैदा हो गया है। मौसम के बदलने के लिए साथ ही मवेशियों के लिए चारे की समस्या विकराल रहती है। मवेशी पालकों के लिए चारा की व्यवस्था करना समस्या बना हुआ है। वहीं मवेशियों को चारे के लिए मजबूरन लोगों को जंगल का सहारा लेना पड़ रहा है। हालांकि जंगलों में भी इस तरह के अवैध खनन की वजह से प्राकृतिक चारा आदि की कमी देखी जा रही है। इस तरह की लापरवाही के चलते जहां सरकारी चरनोई भूमि लापता होती जा रही है तो वहीं अवैध खनन से गांव में बड़ी बड़ी खतियां मुसीबत का कारण बनती जा रही है।

शासन को हो रही क्षति

आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में एक दर्जन से अधिक गांव में अवैध खनन का प्रचलन जारी है। गांव-गांव में अवैध खनन जोरो पर है। इतना ही नहीं राजस्व तथा खनिज विभाग की लापरवाही के चलते सरकारी चरनोई भूमि या तो लापता हो गई है या फिर वहां गड़े बन गये हैं। बताया जा रहा है कि अवैध कारोबार की वजह से शासन को प्रतिमाह लाखो रूपये का नुकसान हो रहा है। ऐसा नहीं है कि खनिज विभाग द्वारा इस तरह के अवैध कारोबार पर रोक लगाने का प्रयास नहीं किया जाता है। विभाग द्वारा लगातार नजर रखी जाती है लेकिन रात के अंधेरे में ठेकेदार के गुर्गे खनिज पदार्थों की कालाबाजारी करने में लगे रहते हैं। गांव में चल रहे सड़क, पुलिया, एप्रोच मार्ग सहित अन्य निर्माण कार्यों के लिए गिट्टी, पत्थर, की जरूरत पड़ती है जिसे किसी अनुमति के बिना या रायल्टी के मिट्टी मुरूम का भी न केवल अवैध खनन किया जा रहा है बल्कि उसे विकासखंड के अलावा शहर सहित आसपास विकासखंड में भी बेखौफ होकर भेजा जा रहा है। इसे लेकर जिला खनिज अधिकारी मनीष पालेवार मामले की जानकारी जुटाकर कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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