आशीष मिश्रा, छिंदवाड़ा। जो अनाज गरीबों का निवाला बनता वह प्रशासनिक लापरवाही के चलते खुले में रखे-रखे सड़ गया है। अब यह गेहूं जानवरों के खाने लायक भी नहीं रह गया है। मामला छिंदवाड़ा जिले के चौरई ब्लाक के चंदनवाड़ा का है। यहां 16 महीने से खुले में रखे रहने के कारण 26 करोड़ से ज्यादा कीमत का अनाज सड़ गया। यहां 47 हजार टन गेहूं खुले में कैप में रखा गया, जिसमें से लगभग 14 हजार टन गेहूं बारिश में भीगकर एवं अन्य कारणों से खराब हो गया है। गेहूं खराब होने की वजह यह है कि इसे सिर्फ तिरपाल से ढंका गया था।

गेहूं के अनेक बोरों में गेहूं अंकुरित हो गया है, दाना भी काला पड़ गया है। ताज्जुब यह है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजी लिखा पढ़ी का हवाला दे रहे हैं। 2020 में 1925 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य पर शासन ने गेहूं की खरीदी की थी। सिवनी जिले में भंडारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण चौरई के चंदनवाड़ा ओपन कैप में 47 हजार टन गेहूं भंडारित किया गया था।

मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित (मार्कफेड) द्वारा इस गेहूं को गरीबों तक पहुंचाया जाना था। बीते दिनों जब दोनों विभाग के अधिकारी गेहूं का निरीक्षण करने पहुंचे तो हकीकत सामने आई। गेहूं के बोरों की छल्लियों से बदबू आ रही है। बोरों में गेहूं अंकुरित हो गया है। अनाज के दाने काले पड़ गए हैं। सुरक्षित बचा अनाज भी सड़ने की कगार पर पहुंच गया है। ऐसे में विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि भंडारण के दौरान सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए। गोदाम खाली होने के बाद भी अनाज को शिफ्ट नहीं किया गया।

बार-बार पत्र लिखने के बाद भी जिम्मेदारों ने नहीं दिया ध्यान

मार्कफेड के जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) हीरेंद्र रघुवंशी ने बताया कि लंबे समय से अनाज के भंडारण के कारण ऐसी स्थिति बनी है। इस भंडारित अनाज को उठाने के लिए कई बार बड़े अधिकारियों को पत्र लिखा गया था, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं की गई। इनका कहना है कि लंबे समय से अनाज के भंडारण के कारण ऐसी स्थिति बनी है। ब्लाक स्तर पर गोदाम प्रभारी, सहकारी बैंक और नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के अधिकारियों को टीम में शामिल किया गया है। सैंपल लेकर अनाज की जांच खाद्य विभाग की मदद से कराई जा रही है। वहीं इस बारे में गोदाम प्रभारी अवधेश तिवारी ने कहा कि शासन द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की जाती है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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