अब जांच पर नहीं निकलते सचिव व निरीक्षक

फोटो-3 नव दुनिया

पिछले दो वर्षों से अधिकारी व कर्मचारी नहीं हुए सवार,

छिंदवाड़ा। मंडी राजस्व की चोरी रोकने स्थानीय मंडी उड़नदस्ता तथा संभागीय उड़नदस्ता को लगाया जाता है लेकिन यह दोनों ही उड़नदस्ते लंबे समय से जिले में नजर ही नहीं आए है। कृषि उपज मंडी का उड़नदस्ता वाहन तो कंडम होने के कारण कई वर्षों से कबाड़ में पड़ा हुआ है। वाहन के कंडम होने से मंडी की जांच सिर्फ फाइलों में हो रही है। संभागीय उड़नदस्ता मंडी कार्यालय जबलपुर से संचालित होता है जिस पर डीएस का कंट्रोल होता है। लेकिन मक्का व गेहूं के सीजन के दौरान भी यह उड़नदस्ता जांच करने नहीं निकला। जिसके कारण अनाज का अवैध परिवहन कर मंडी को लाखों के टैक्स की हानि हुई। अवैध परिवहन की सूचना के बाद भी मंडी कर्मचारी वाहन नहीं होने से मौके पर नहीं पहुंच पाते है या फिर जब तक प्रबंधन वाहन की व्यवस्था करता है तब तक अवैध परिवहन करने वाले वाहन निकल जाते है।

- पांढुर्ना मंडी के वाहन में संचालित होता रहा संभागीय उड़नदस्ता

पूर्व में मंडी बोर्ड कार्यालय जबलपुर के आदेश के बाद संभागीय उड़नदस्ता जिले में जांच करने पहुंचता था लेकिन जांच के लिए पांढुर्ना मंडी का वाहन लिया जाता था तथा जांच के बाद वाहन को लौटा दिया जाता था। पांढुर्ना मंडी का वाहन भी जर्जर हो गया है जिसके कारण संभागीय उड़नदस्ते को जिले में वाहन ही नहीं मिल पाने से कर्मचारी जांच करने जिले में नहीं पहुंच रहे है। पिछले दो वर्षों में संभागीय उड़नस्ते की कोई भी बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है जबकि कागजों में बकायदा यह उड़नदस्ता संचालित हो रहा है।

- वाहन पर टैक्स है बकाया

कृषि उपज मंडी ने अपने वाहन का टैक्स ही अदा नहीं किया जिसके कारण कोई भी कर्मचारी इसमें सवार होने से बचता आया है सूत्रों की माने तो यह उड़नदस्ता वाहन खड़े- खड़े ही कंडम हो गया। गोदामों व वेयर हाउस की जांच करने कर्मचारियों व अधिकारियों को स्वंय के वाहनों को उपयोग करना होता है मंडी प्रबंधन द्वारा किसी भी तरह का कोई अलाउंस नहीं मिलने से कर्मचारी अपने वाहनों का उपयोग करने से बचते है।

- अंतरराज्यीय बेरियर पर हो रहा खेल

स्थानीय मंडियों व संभागीय उड़नदस्ते के द्वारा जांच नहीं किए जाने के बाद अंतर्राज्यीय बैरियरों पर जांच का दबाव बढ़ गया है। इस बैरियरों पर पदस्थ कर्मचारी लंबे समय से जमे हुए है। इन कर्मचारियों पर अवैध परिवहन को लेकर कई बार आरोप लग चुके है जिन्हें हटाया भी गया लेकिन पुनः पदस्थ कर दिया गया है। सूत्रों की माने तो इन पदस्थ कर्मचारियों की मिली भगत से अवैध परिवहन लगातार चालू है। जांच नहीं होने से लगातार यहीं स्थिति निर्मित हो रही है।